पुआल की आठ फीट की गणेश जी की मूर्ति 20 हजार रुपये की है। जबकि छह इंच से पांच फीट तक की मूर्ति 300 से 15 हजार तक की हैं। वहीं, भगवान विश्वकर्मा की 6 इंच से 3 फीट तक की मूर्तियां सौ रुपये से एक हजार तक की हैं। माता पार्वती की छह इंच की ही मूर्ति बिकती हैं, जो थोक में 20 से 30 रुपये पीस है। जीमी ने बताया कि इको फ्रेंडली मूर्तियां बन रही हैं। क्योंकि ज्यादा लोग कुंडों व तालाबों में गंदगी के कारण घरों में विसर्जित कर रहे हैं।
गणेश जी की पगड़ी और बाल रूप की मूर्तियों की मांग ज्यादा है। मूर्तिकार 30 तरह की मूर्तियां बना रहे हैं। विश्वकर्मा जी की हाथी पर सवारी और सिंहासन पर विराजमान वाली मूर्ति है। वहीं शिव-पावर्ती की बैठे और खड़े आकार वाली ही मूर्तियां बिकती हैं।
बनारस में त्योहारों पर रेडिमेड मूर्तियां भी बिकती हैं। कारोबारी कोलकाता से भी मूर्तियां मंगाते हैं। जिले में कोलकाता से करीब 10 हजार मूर्तियां मंगाई गई हैं। लक्सा के कारोबारी रवि, राजेश व दिनेश प्रजापति ने बताया कि कोलकाता से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भी मूर्तियां मंगाई गईं थीं। अभी त्योहारों को देखते हुए गणेश जी, लक्ष्मी-गणेश जी, शिव-पार्वती आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां मंगाई गईं हैं। इनके दाम में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वाराणसी जिले में 18 सितंबर से गणेशोत्सव की धूम रहेगी। मगर इस बार विघ्न विनाशक चंद्रयान के सिंहासन पर विराजमान होंगे। गणपति को पांच दिनों तक अलग-अलग सिंहासन पर भी विराजमान कराया जाएगा। गणेशोत्सव पर शहर में दो दर्जनभर से अधिक संस्थाएं विविध आयोजन करती हैं। साथ ही धार्मिक अनुष्ठान और प्रतियोगिताएं भी होती हैं। श्रीगणेश उत्सव सेवा समिति के सदानंद पाठक ने बताया कि इस बार चंद्रयान-3 के रूप में सिंहासन बनाया जाएगा। इसी पर गणेश जी को विराजमान किया जाएगा।