0शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। चौक स्थित प्राचीन चंद्रघंटा मंदिर में तड़के मंगला आरती संपन्न होने के साथ ही मां के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ, जो शयन आरती तक अनवरत चलता रहा। दिनभर मंदिर परिसर भक्तों के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा। रात 12 बजे तक हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन पूजन किया।
ब्रह्म मुहूर्त में देवी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए गए। इसके बाद माता का विविध मनोहारी पुष्पों और घंटियों की माला से अलौकिक शृंगार किया गया। शंखनाद और घंटा-घड़ियालों की मंगल ध्वनि के बीच आरती संपन्न हुई। मंदिर के अर्चक वैभव नाथ योगेश्वर ने बताया कि शाम को मां का क्षत्र लगाकर विशेष शृंगार किया गया। भोग अर्पित हुआ और विधि-विधान से हवन अनुष्ठान संपन्न कराया गया। मंदिर परिसर में स्थापित नवदुर्गा के विग्रहों के दर्शन के लिए भी दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु कतारबद्ध दिखे।
दुर्गाकुंड में मां कूष्मांडा के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को मां कूष्मांडा के दर्शन के लिए भी भीड़ उमड़ी रही। मंदिर के पुजारी विश्वेश्वर झा सोनू ने बताया कि मंगला आरती और शृंगार के बाद रात में तीन बजे मंदिर के पट खोले गए। मां का 24 घंटे में दो बार शृंगार किया गया। रात 2:30 बजे मां का पंचद्रव्य से स्नान कराया गया। इसके बाद उनका पुष्पों से शृंगार किया गया और उन्हें स्वर्ण हार पहनाया गया। इसके बाद शाम चार बजे उनका चंपा, बेला, रजनी और अन्य कई प्रकार के फूलों से शृंगार किया गया। मां की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। रात 11 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए।
माता चन्द्र घंटा