फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भक्तों की रक्षा के लिए अपने प्रण को भी तोड़ देते हैं भगवान: आचार्य नरदेव गिरी

विज्ञापन
विज्ञापन
जाल्हुपुर मधुकरपुर में मां शीतला मंदिर के समीप चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथा वाचक आचार्य नरदेव गिरी ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रति अत्यंत करुणा और भक्त वत्सल्य से भरे होते हैं। भक्तों की रक्षा करने और उनका मान रखने के लिए स्वयं का लिया हुआ प्रण भी तोड़ देते हैं।
विज्ञापन

उन्होंने महाभारत के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध में अस्त्र-शस्त्र न उठाने का संकल्प लिया था। वहीं, पितामह भीष्म दुर्योधन के पक्ष से युद्ध करते हुए भी यह जानते थे कि वे अधर्म की ओर से युद्ध कर रहे हैं और अंततः विजय धर्म की ही होगी। बावजूद उन्होंने संकल्प लिया कि भगवान श्रीकृष्ण को युद्ध में अस्त्र उठाने पर विवश कर देंगे। युद्ध के दौरान जब भीष्म पितामह के प्रचंड आक्रमण से पांडवों की सेना में हाहाकार मच गया और स्थिति गंभीर हो गई, तब भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों की रक्षा के लिए रथ से उतर पड़े और रथ का पहिया उठाकर भीष्म की ओर दौड़ पड़े। इस प्रकार भगवान ने अपने ही प्रण को तोड़कर यह सिद्ध कर दिया कि भक्तों की रक्षा उनके लिए सर्वोपरि है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें