मंडी संचालक शाजिद ने बताया कि फिलहाल करीब दो हजार बकरे मंडी में आए हैं और अगले दो-तीन दिनों में संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। आजमगढ़, इटावा, कानपुर, गोरखपुर, चंदौली और भदोही समेत कई जिलों के व्यापारी यहां बकरे लेकर पहुंचे हैं।
शहर के जल्लालीपुरा, सरैया, बकरियाकुंड, बड़ी बाजार, बजरडीहा और लोहता समेत कई इलाकों में भी छोटी-छोटी मंडियां सजने लगी हैं, जहां बकरों के साथ भैंसे और दुम्बा की भी बिक्री हो रही है।
जरूरतमंदों की मदद और भाईचारे का संदेश : इस्लाम में बकरीद (ईद-उल-अजहा) त्याग, समर्पण और इंसानियत का पर्व माना जाता है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने की तैयारी दिखाई थी। कुर्बानी केवल रस्म नहीं, बल्कि त्याग, जरूरतमंदों की मदद और भाईचारे का संदेश है। बकरीद का असली उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि इंसानियत, साझेदारी और अल्लाह की रजा हासिल करना है।