समारोह को संबोधित करते हुए विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राम पंथ के पंथाचार्य प्रो. (डॉ.) राजीव श्री गुरुजी ने कहा कि भारतीय समाज में बढ़ती ईर्ष्या, नफरत और पारिवारिक विघटन का मुख्य कारण अपनी संस्कृति से दूर होना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति त्याग, समर्पण और कर्तव्य को सर्वोपरि मानती है, जबकि आधुनिक भौतिकवादी सोच अधिकारों की होड़ को बढ़ावा देती है।
डॉ. राजीव ने भगवान राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और माता जानकी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका त्याग और आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि माता जानकी केवल आदर्श पत्नी ही नहीं, बल्कि विद्वत्ता, साहस, आत्मसम्मान और नेतृत्व क्षमता की भी प्रतीक थीं। उन्होंने महिलाओं से शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मरक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने ढोल की थाप पर पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत कर ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई। समारोह में बड़कू हनुमान आश्रम के मठाधीश स्वामी प्रभु रामदास जी, धर्म प्रवक्ता डॉ. कवीन्द्र नारायण, समाजसेवी शैलेंद्र शुक्ला, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, डॉ. नजमा परवीन, नौशाद दुबे, ओबैदुल्लाह दुबे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और नारी सम्मान के संरक्षण का संकल्प भी दोहराया गया।