इस पर फूलपुर थानाध्यक्ष सिगरा क्षेत्र पहुंचे और अजीम खातून की मां खाना बीबी के बारे में जानकारी कर उससे संपर्क किया। खाना बीबी ने फोटो देखकर शव की पहचान अपने बेटी के रूप में की। साथ ही, यह भी बताया कि उनकी बेटी की करीबी इंग्लिशिया लाइन क्षेत्र में चाय बेचने वाले राजू यादव से थी। फूलपुर थानाध्यक्ष ने दरोगा अमित यादव, शेषनाथ गौड़, विवेकानंद द्विवेदी और डॉ. आलोक कुमार सिंह की टीम के साथ राजू यादव का पता लगाकर उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।
राजू यादव ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि अजीम खातून कैंट स्टेशन से कबाड़ और बोतल बीनने का काम करती थी। वह उसके दुकान पर आती थी। लगभग दो साल से दोनों एक-दूसरे को जानते थे और बेहद करीब आ गए थे। उस समय उसकी पत्नी उससे अलग रहती थी तो अजीम खातून की करीबी उसे अच्छी लगती थी। लगभग चार महीने से उसकी पत्नी वापस घर आ गई थी तो वह अजीम खातून से कन्नी काटने लगा था। वहीं, अजीम खातून उसकी दुकान पर आकर शादी करने का दबाव बनाती थी।
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मना करने पर झगड़ा करती थी और मुकदमे में फंसाने की धमकी देती थी। इससे परेशान होकर उसने अजीम खातून को चार सितंबर की शाम घूमने चलने के लिए बुलाया। दोनों बाइक से फुलवरिया से साथ ही निकले। बाबतपुर के आगे मानापुर के समीप उसने सुनसान स्थान देखकर बाइक रोकी और अजीम खातून के गले से दुपट्टा खींच लिया। इसके बाद दुपट्टे से ही गला कसकर उसने अजीम खातून की हत्या कर दी और शव धान के खेत में छोड़कर बाइक से घर चला आया।
फूलपुर थानाध्यक्ष दीपक कुमार राणावत ने बताया कि राजू यादव से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। चार सितंबर की शाम राजू यादव अपनी बाइक लेकर फुलवरिया, शिवपुर होते हुए बाबतपुर के आगे तक गया था। इस मार्ग पर 13 स्थानों पर लगे सीसी कैमरों में राजू अपनी बाइक पर पीछे अजीम खातून को बैठा कर ले जाते हुए कैद हुआ था।