फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बनारसः पहले मनमाने ढंग से की सड़कों की खुदाई, अब सर्वे की याद आई

Mon, 18 Jun 2018 03:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
बनारस शहर में आईपीडीएस से लेकर तमाम तरह के भूमिगत कार्यों के लिए विभागों ने बिना किसी रोक-टोक खुदाई कर सड़कों को खोद डाला है। विभागीय सामंजस्य न होने से जमीन के अंदर पाइप लाइन-सीवर लाइन, सीएनजी-पीएनजी लाइन से लेकर बिजली और फोन केबल का जाल बिछ गया।

 

स्थिति यह है कि एक फाल्ट होने पर उसे सुधारने में दूसरे फाल्ट होने लगे हैं। भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च कर भूमिगत सीवेज-पेयजल पाइप लाइन, ओएफसी वायर, बिजली केबल की जानकारी के लिए जीआई सर्वे कराया जाएगा। 

विज्ञापन

 

जीआई सर्वे के जरिए भूमिगत पाइप लाइन और वायर-केबल मैप तैयार किया जाएगा। उनकी टर्निंग, ज्वाइंट और उन्हें कितनी गहराई पर बिछाया गया है, यह सब जानकारियां नक्शे में होंगी।
 

मिट्टी कैसी है और वहां कितनी गहराई तक खुदाई सुरक्षित होगी, इसका भी पता चल जाएगा। जीआई सर्वे के लिए 10 करोड़ रुपये का टेंडर चेन्नई की कंपनी को दिया गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

ये होंगे फायदे

शहर में करीब 1500 किमी लंबी सीवर और पेयजल पाइप लाइन बिछाई गई है लेकिन न तो इसका नक्शा है और न ही यह जानकारी कि कहां कितनी गहराई से पाइप लाइन या केबल ले जाया गया है। इसके चलते विकास कार्यों के लिए सड़कों की खुदाई के दौरान आए दिन पाइप लाइन और केबल क्षतिग्रस्त हो जा रहे हैं।

भूमिगत पाइप लाइन का कोई मैप न होने से सिर्फ आईपीडीएस के कार्यों के दौरान ही दो सौ से अधिक जगहों पर पेयजल और सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हुईं। इनकी मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं।

वहीं विकास कार्यों के लिए जिन सड़कों की खुदाई करनी होगी, पहले जीआई सर्वे से तैयार वहां के नक्शे को देखा जाएगा। कार्यदायी संस्था को भी यह मैप दिया जाएगा।

इसी आधार पर उसे खुदाई करानी होगी ताकि उसके कार्य के दौरान कोई दूसरी लाइन क्षतिग्रस्त न होने पाए। अगर बिजली की केबल है तो उसके अनुरूप खुदाई में सावधानी बरती जा सकेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें