बनारस शहर में आईपीडीएस से लेकर तमाम तरह के भूमिगत कार्यों के लिए विभागों ने बिना किसी रोक-टोक खुदाई कर सड़कों को खोद डाला है। विभागीय सामंजस्य न होने से जमीन के अंदर पाइप लाइन-सीवर लाइन, सीएनजी-पीएनजी लाइन से लेकर बिजली और फोन केबल का जाल बिछ गया।
स्थिति यह है कि एक फाल्ट होने पर उसे सुधारने में दूसरे फाल्ट होने लगे हैं। भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च कर भूमिगत सीवेज-पेयजल पाइप लाइन, ओएफसी वायर, बिजली केबल की जानकारी के लिए जीआई सर्वे कराया जाएगा।
जीआई सर्वे के जरिए भूमिगत पाइप लाइन और वायर-केबल मैप तैयार किया जाएगा। उनकी टर्निंग, ज्वाइंट और उन्हें कितनी गहराई पर बिछाया गया है, यह सब जानकारियां नक्शे में होंगी।
मिट्टी कैसी है और वहां कितनी गहराई तक खुदाई सुरक्षित होगी, इसका भी पता चल जाएगा। जीआई सर्वे के लिए 10 करोड़ रुपये का टेंडर चेन्नई की कंपनी को दिया गया है।