शिखा मेनन निर्देशित बैचलर गर्ल मुंबई में लड़कियों के लिए घर की समस्या पर केंद्रित है। फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने किया। स्वागत समन्वयक प्रो. संजय और गांधी अध्ययनपीठ के निदेशक प्रो. आर.पी. द्विवेदी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शैला परवीन और डॉ. संदीप गिरि ने किया। संचालन डॉ. निमिषा गुप्ता का रहा।
समलैंगिकता को कब मिलेगी मन से स्वीकार्यता
मावा के संस्थापक हरीश सदानी ने कहा कि समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिल चुकी है परंतु लोगों के मन से स्वीकार्यकता कब मिलेगी। यह बड़ा प्रश्न है। फिल्म मेकर मीनाक्षी सहारन ने सेक्सुअलिटी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में बहुत असमानता हे। इस मुद्दे को बातचीत से ही समझा और समझाया जा सकता है। अल्तमश खान ने कहा कि अब फिल्में सवाल करने लगी हैं और रुढ़िवादिता को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती हैं। छात्रों के प्रश्नों का रश्मि लांबा ने जवाब भी दिया।