शासन के निर्देश पर लखनऊ से आए मुख्य अभियंता ने देर रात किया निरीक्षण किया और ये नतीजा निकला कि रोबोटिक कैमरे की मदद से घोड़ा नाला की मरम्मत की जाएगी। बता दें कि रोपवे की पाइलिंग के दौरान गोदौलिया चौराहे पर शाही नाले के एक हिस्से की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी।
रोपवे की पाइलिंग के दौरान गोदाैलिया चौराहे पर शाही नाले के एक हिस्से घोड़ा नाला की 25 फीट दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसकी मरम्मत रोबोटिक कैमरे की मदद से की जाएगी। लखनऊ से जल निगम के मुख्य अभियंता संजय कुमार गौतम गोदौलिया पहुंचे।
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उन्होंने निरीक्षण के दौरान विभागीय इंजीनियरों को रोबोटिक कैमरे की मदद से सुरक्षा पहलुओं को पूरी तरह से अध्ययन के बाद जल्द से जल्द काम शुरू कराने की हिदायत दी। उनके जाने के बाद वहां मरम्मत से जुड़े सामान पहुंचने लगे हैं।
विभागीय इंजीनियरों के अनुसार सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएंगे। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू होगा। नाले के अंदर कुछ भाग काफी खतरनाक हैं। इस नाते रोबोटिक कैमरों का सहारा लिया जाएगा। इससे अंदर की तस्वीर के आधार पर काम शुरू कराया जाएगा।
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पिछले दिनों दुर्गाघाट के शाही नाले की मरम्मत में खतरे को देखते हुए रोबोटिक कैमरे की मदद ली गई थी। बारिश के मौसम में नाले की मरम्मत किसी चुनौती से कम नहीं है। फिर भी काम को जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा।
काम को पूरा कराने में 30 से 40 दिन का समय लग सकता है। चूंकि पहले चरण में सीवर चैंबरों को खोजा जाएगा। इसके बाद सभी सीवर चैंबरों को खोला जाता है ताकि सीवर से बनने वाली गैस बाहर निकल जाए। इसके बाद उस स्थान को खोदा जाएगा जहां नाला क्षतिग्रस्त हुआ है। उसकी पूरी चहारदीवारी बनाई जाएगी। उसके फ्लो को किसी प्रकार से छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा।
सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है शहर की सीवर व्यवस्था
शहर की सीवर व्यवस्था सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है। शाही नाला जिसे मुगलों ने सुरंग के रूप में विकसित किया था। बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने उसे सीवर व्यवस्था में तब्दील कर दिया। नाले की उम्र 200 साल से भी ज्यादा हो गई। जगह-जगह तोड़फोड़ कर लोगों ने अपनी सीवर लाइन जुड़वा ली है। नतीजा यह नाला भी जीर्णशीर्ण हो गया है।