बारिश: मकान गिरने से दो लोगों की गई जान
अमर उजाला ब्यूरो
सुहवल/बहरियाबाद/मरदह। बारिश के दौरान सुहवल थाना क्षेत्र के गौरा गांव में रिहायशी झोपड़ी गिरने से जहां पिता की मौत हो गई। वहीं, पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं बहरियाबाद क्षेत्र में दीवार गिरने से युवक की मौत हो गई। उधर, मरदह थाना क्षेत्र के केलही गांव में कच्चा मकान गिरने से पति-पत्नी संग बेटा घायल हो गया। अफसरों ने मौका मुआयना किया।
सुहवल क्षेत्र के गौरा गांव निवासी मुरली यादव (64) अपने पुत्र रामविलास यादव (42) के साथ डेरा पर स्थित रिहायशी झोपड़ी में सो रहे थे। बारिश के दौरान देर रात किसी समय झोपड़ी गिर पड़ी। रविवार की सुबह जब काफी देर बाद भी दोनों घर नहीं लौटे तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिजन डेरा पर पहुंचे तो गिरी झोपड़ी देख उनके होश उड़ गए। देखा कि मलबा में मुरली यादव और रामविलास दबे हुए थे। रामविलास कराह रहा था, जबकि पिता मुरली के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। जानकारी होते ही वहां ग्रामीण पहुंच गए। यह जानकारी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतीपुर भेजा, जहां चिकित्सकों ने मुरली को मृतक घोषित करते हुए उसके पुत्र रामविलास को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। प्रभारी निरीक्षक संजय वर्मा ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उपजिलाधिकारी जमानिया रमेश मौर्या, तहसीलदार आलोक कुमार ने मौके पर पहुंच जानकारी ली। बहरियाबाद: थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी बेचन मियां (40) रविवार की सुबह करीब 11 बजे पत्नी के साथ अपने घर में बैठकर खाना खा रहे थे। इसी दौरान बारिश के बीच पड़ोसी के मकान की दीवार गिर गई, जिससे बेचन की जहां मौके पर ही मौत हो गई, वहीं उनकी पत्नी आसमां गंभीर रूप से घायल हो गई। आनन-फानन में परिवार के लोग उसे उपचार के लिए वाराणसी ले गए। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया।
उधर, मरदह थाना क्षेत्र के केलही गांव में बारिश के दौरान शनिवार की रात करीब दो बजे एक कच्चा मकान गिर गया। उसमें सो रहे भीम यादव (45), उसकी पत्नी रीता यादव (40) और पुत्र गोलू (10) मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला और प्राइवेट अस्पताल में ले गए। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक ने सभी को रेफर कर दिया। तीनों को मऊ सदर अस्पताल में ले जाया गया, जहां गंभीर हालत के बीच उपचार चल रहा है।
उधर जिले में बाढ़ से तबाही मचा रही गंगा तो फिलहाल स्थिर बनी हुई है लेकिन इसकी सहायक नदियां तेवर में आ गई है। बेसो, मगई, आदि नदियां बढ़ रही है। गांगी नदी का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया है। दर्जनों गांव इसकी चपेट में आ गए हैं। उदंती नदी के चलते शादियाबाद में सड़कों पर चार फीट पानी बह रहा है। मगई नदी से भी दर्जन भर गांव घिरे हुए हैं। इधर गोमती भी घटाव पर है। नदी का जलस्तर कम होने की खबर से पीड़ितों को थोड़ी राहत मिली है। अब धीरे-धीरे ग्रामीणों का भय खत्म हो रहा है। हालांकि अभी भी गंगा से सैकड़ों गांव पानी से घिरे हुए हैं। शिविरों में रह रहे लोग बदहाली के बीच जी रहे हैं। किसानों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है।
शहर के ददरीघाट, कलक्टरघाट, पोस्ताघाट आदि पर गंगा का पानी कम होने लगा है। कुर्था, बयेपुर आदि गांवों में भी राहत दिखाई दे रही है। करंडा क्षेत्र के सोकनी, पुरैना, जैतपुरा आदि की स्थिति अभी बहुत नहीं बदली है। पानी गांवों के बाहर पसरा हुआ है। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार लगातार बारिश के चलते पिछले दो दिनों से उदंती नदी उफान पर है। तटवर्ती गांवों में नदी का पानी चढ़ गया है। कई घरों में पानी घुस जाने के कारण लोग पलायन के मूड में हैं। उनके रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है।
बाढ़ के कारण लोग दूसरों के घर या स्कूलों में शरण लेने को विवश हैं। सीमावर्ती जिले आजमगढ़ के बेला, नाथपुर, सुल्तानीपुर, रामपुर, सेताकापुरा, पियरी, कुजरांव, खरका, बनगांव आदि सीमावर्ती दर्जनों गांवों के लोग बहरियाबाद बाजार पर ही आश्रित हैं। उदंती नदी का पानी सड़क से चार फीट ऊपर से प्रवाहित होने के कारण बाजार आने से वंचित रह जा रहे हैं या फिर जान जोखिम में डालकर बाजार करने आ रहे हैं। औड़िहार संवाददाता के मुताबिक व्यापक वर्षा के चलते सैदपुर एवं सादात क्षेत्र में बहने वाली छोटी नदियां गांगी, उदंती भी उफान पर हैं। इन नदियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में तबाही मचाते हुये सैकड़ों बीघे भूमि की खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया है। इन नदियों के किनारे पड़ने वाले गांवों का संपर्क एक-दूसरे से टूट गया है। गांगी नदी के चलते अमुवारा, सवना, लौलहा, मठिया, डहरा कला, डहरा खुर्द, निंदोपुर, उचौरी, भीमापार, बिझवल, निजामपुर, भितरी, सराय हेतिम, महमूदपुर-हथिनी, देवकली आदि दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी खेत खलिहानों को चपेट में लेने के बाद बस्ती की तरफ़ बढ़ने लगा है। गंगा के तटवर्ती गांवों रामपुर, मंझरिया, मांझा, नारी पचदेवरा, टोडरपुर, फुलवारी कला, दुबैथा, गायघाट, आराजीगंज, कोल्हुआ टोला, जौहरगंज, रामतवक्का, औड़िहार, पटना, गोपालपुर, गजाधरपुर, शादी-भादी आदि गांवों में हल्की राहत मिली है। इधर गोमती की बाढ़ का पानी अभी कई गांवों में बना हुआ है। गोरखा, सूर्यभानचक, खरौना, सिधौना आदि गांवों तथा खलिहानों से पानी निकल रहा है। रेवतीपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के तटवर्ती गांव डूहियां, कासिमपुर, बहलोलपुर, मेदिनीपुर, ताडीघाट, कालूपुर, बवाड़ा, युवराजपुर, पटकनिया, भगीरथपुर, गरुआ मकसूदपुर, इजरी, बैकुंठपुर, घाटमपुर, मलसा, पिपरा आदि गांवों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। पानी के घटने की खबर से शिविरों में रह रहे लोगों को हल्का सा संतोष दिख रहा है। कुछ गांवों से देर रात तक पानी धीरे-धीरे निकलने की संभावना जताई गई है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के धर्मपुरा, फिरोजपुर गांवों में अभी पानी बना हुआ है। वीरपुर से भागड़ा के माध्यम से निकले नाले में भी गंगा के पानी का दबाव बना हुआ है। कठार, निकरोजपुर, आमघाट, रानीपुर, नकटीकोल आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार मगई नदी के बढ़ाव से मसौनी, लौवाडीह, सियाड़ी, गोड़उर, महेंद, देवरिया, सरदरपुर, नसरतपुर, जोगा मुसाहिब गांव के सिवानों में अभी भी पानी जमा हुआ है। राजापुर, परसा, खेमपुर, सिलाइच आदि गांव पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। प्रशासन की ओर से समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने से पीड़ित इधर-उधर भटक रहे हैं। करीमुद्दीनपुर संवाददाता के अनुसार मगई नदी से क्षेत्र के करीमुद्दीनपुर, राजापुर, शेरमठ, उत्तमपुर, लट्ठूडीह, बाबूलाल का पुरा, कबीरपुर, सोनवानी, अल्लापुर आदि गांव की सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई है। गांवों पर भी संकट बना हुआ है। अमर उजाला ब्यूरो
सुहवल/बहरियाबाद/मरदह। बारिश के दौरान सुहवल थाना क्षेत्र के गौरा गांव में रिहायशी झोपड़ी गिरने से जहां पिता की मौत हो गई। वहीं, पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं बहरियाबाद क्षेत्र में दीवार गिरने से युवक की मौत हो गई। उधर, मरदह थाना क्षेत्र के केलही गांव में कच्चा मकान गिरने से पति-पत्नी संग बेटा घायल हो गया। अफसरों ने मौका मुआयना किया।
सुहवल क्षेत्र के गौरा गांव निवासी मुरली यादव (64) अपने पुत्र रामविलास यादव (42) के साथ डेरा पर स्थित रिहायशी झोपड़ी में सो रहे थे। बारिश के दौरान देर रात किसी समय झोपड़ी गिर पड़ी। रविवार की सुबह जब काफी देर बाद भी दोनों घर नहीं लौटे तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिजन डेरा पर पहुंचे तो गिरी झोपड़ी देख उनके होश उड़ गए। देखा कि मलबा में मुरली यादव और रामविलास दबे हुए थे। रामविलास कराह रहा था, जबकि पिता मुरली के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। जानकारी होते ही वहां ग्रामीण पहुंच गए। यह जानकारी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतीपुर भेजा, जहां चिकित्सकों ने मुरली को मृतक घोषित करते हुए उसके पुत्र रामविलास को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। प्रभारी निरीक्षक संजय वर्मा ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उपजिलाधिकारी जमानिया रमेश मौर्या, तहसीलदार आलोक कुमार ने मौके पर पहुंच जानकारी ली। बहरियाबाद: थाना क्षेत्र के मिर्जापुर निवासी बेचन मियां (40) रविवार की सुबह करीब 11 बजे पत्नी के साथ अपने घर में बैठकर खाना खा रहे थे। इसी दौरान बारिश के बीच पड़ोसी के मकान की दीवार गिर गई, जिससे बेचन की जहां मौके पर ही मौत हो गई, वहीं उनकी पत्नी आसमां गंभीर रूप से घायल हो गई। आनन-फानन में परिवार के लोग उसे उपचार के लिए वाराणसी ले गए। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया।
उधर, मरदह थाना क्षेत्र के केलही गांव में बारिश के दौरान शनिवार की रात करीब दो बजे एक कच्चा मकान गिर गया। उसमें सो रहे भीम यादव (45), उसकी पत्नी रीता यादव (40) और पुत्र गोलू (10) मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला और प्राइवेट अस्पताल में ले गए। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक ने सभी को रेफर कर दिया। तीनों को मऊ सदर अस्पताल में ले जाया गया, जहां गंभीर हालत के बीच उपचार चल रहा है।
उधर जिले में बाढ़ से तबाही मचा रही गंगा तो फिलहाल स्थिर बनी हुई है लेकिन इसकी सहायक नदियां तेवर में आ गई है। बेसो, मगई, आदि नदियां बढ़ रही है। गांगी नदी का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया है। दर्जनों गांव इसकी चपेट में आ गए हैं। उदंती नदी के चलते शादियाबाद में सड़कों पर चार फीट पानी बह रहा है। मगई नदी से भी दर्जन भर गांव घिरे हुए हैं। इधर गोमती भी घटाव पर है। नदी का जलस्तर कम होने की खबर से पीड़ितों को थोड़ी राहत मिली है। अब धीरे-धीरे ग्रामीणों का भय खत्म हो रहा है। हालांकि अभी भी गंगा से सैकड़ों गांव पानी से घिरे हुए हैं। शिविरों में रह रहे लोग बदहाली के बीच जी रहे हैं। किसानों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है।
शहर के ददरीघाट, कलक्टरघाट, पोस्ताघाट आदि पर गंगा का पानी कम होने लगा है। कुर्था, बयेपुर आदि गांवों में भी राहत दिखाई दे रही है। करंडा क्षेत्र के सोकनी, पुरैना, जैतपुरा आदि की स्थिति अभी बहुत नहीं बदली है। पानी गांवों के बाहर पसरा हुआ है। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार लगातार बारिश के चलते पिछले दो दिनों से उदंती नदी उफान पर है। तटवर्ती गांवों में नदी का पानी चढ़ गया है। कई घरों में पानी घुस जाने के कारण लोग पलायन के मूड में हैं। उनके रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है।
बाढ़ के कारण लोग दूसरों के घर या स्कूलों में शरण लेने को विवश हैं। सीमावर्ती जिले आजमगढ़ के बेला, नाथपुर, सुल्तानीपुर, रामपुर, सेताकापुरा, पियरी, कुजरांव, खरका, बनगांव आदि सीमावर्ती दर्जनों गांवों के लोग बहरियाबाद बाजार पर ही आश्रित हैं। उदंती नदी का पानी सड़क से चार फीट ऊपर से प्रवाहित होने के कारण बाजार आने से वंचित रह जा रहे हैं या फिर जान जोखिम में डालकर बाजार करने आ रहे हैं। औड़िहार संवाददाता के मुताबिक व्यापक वर्षा के चलते सैदपुर एवं सादात क्षेत्र में बहने वाली छोटी नदियां गांगी, उदंती भी उफान पर हैं। इन नदियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में तबाही मचाते हुये सैकड़ों बीघे भूमि की खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया है। इन नदियों के किनारे पड़ने वाले गांवों का संपर्क एक-दूसरे से टूट गया है। गांगी नदी के चलते अमुवारा, सवना, लौलहा, मठिया, डहरा कला, डहरा खुर्द, निंदोपुर, उचौरी, भीमापार, बिझवल, निजामपुर, भितरी, सराय हेतिम, महमूदपुर-हथिनी, देवकली आदि दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी खेत खलिहानों को चपेट में लेने के बाद बस्ती की तरफ़ बढ़ने लगा है। गंगा के तटवर्ती गांवों रामपुर, मंझरिया, मांझा, नारी पचदेवरा, टोडरपुर, फुलवारी कला, दुबैथा, गायघाट, आराजीगंज, कोल्हुआ टोला, जौहरगंज, रामतवक्का, औड़िहार, पटना, गोपालपुर, गजाधरपुर, शादी-भादी आदि गांवों में हल्की राहत मिली है। इधर गोमती की बाढ़ का पानी अभी कई गांवों में बना हुआ है। गोरखा, सूर्यभानचक, खरौना, सिधौना आदि गांवों तथा खलिहानों से पानी निकल रहा है। रेवतीपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के तटवर्ती गांव डूहियां, कासिमपुर, बहलोलपुर, मेदिनीपुर, ताडीघाट, कालूपुर, बवाड़ा, युवराजपुर, पटकनिया, भगीरथपुर, गरुआ मकसूदपुर, इजरी, बैकुंठपुर, घाटमपुर, मलसा, पिपरा आदि गांवों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। पानी के घटने की खबर से शिविरों में रह रहे लोगों को हल्का सा संतोष दिख रहा है। कुछ गांवों से देर रात तक पानी धीरे-धीरे निकलने की संभावना जताई गई है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के धर्मपुरा, फिरोजपुर गांवों में अभी पानी बना हुआ है। वीरपुर से भागड़ा के माध्यम से निकले नाले में भी गंगा के पानी का दबाव बना हुआ है। कठार, निकरोजपुर, आमघाट, रानीपुर, नकटीकोल आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार मगई नदी के बढ़ाव से मसौनी, लौवाडीह, सियाड़ी, गोड़उर, महेंद, देवरिया, सरदरपुर, नसरतपुर, जोगा मुसाहिब गांव के सिवानों में अभी भी पानी जमा हुआ है। राजापुर, परसा, खेमपुर, सिलाइच आदि गांव पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। प्रशासन की ओर से समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने से पीड़ित इधर-उधर भटक रहे हैं। करीमुद्दीनपुर संवाददाता के अनुसार मगई नदी से क्षेत्र के करीमुद्दीनपुर, राजापुर, शेरमठ, उत्तमपुर, लट्ठूडीह, बाबूलाल का पुरा, कबीरपुर, सोनवानी, अल्लापुर आदि गांव की सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई है। गांवों पर भी संकट बना हुआ है।