किसानों ने डीएम दफ्तर के सामने आलू गिराकर मांगा समर्थन मूल्य
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अपनी मांगे मनवाने के लिए गाजीपुर जिले के किसानों ने मंगलवार को अनोखा तरीका अपनाया। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने आलू का समर्थन मूल्य 1250 रुपये कुंतल कराने, फसल बर्बाद करनेवाले पशुओं पर प्रभावी नियंत्रण सहित अन्य मांगों को लेकर डीएम-एसपी कार्यालय के सामने सड़क पर दौ सौ कुंतल आलू गिरा दिए। पूरी सड़क आलू से पट गई थी।
वे वहां छोड़ने के लिए वाहनों में भर कर मवेशियों को भी ले आए थे पर प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध पर उन्हें नहीं छोड़ा। बाद में सरजू पांडेय पार्क में धरना दिया। किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक एसडीएम विनय कुमार को सौंपा। चेतावनी दी की अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उनका आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
धरना सभा में प्रांतीय मंत्री एवं पूर्व विधायक राजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार आलू का समर्थन मूल्य 1250 प्रति कुंतल करे। फसलों को बर्बाद करने वाले पशुओं की समस्या का भी समाधान करे। नंदगंज चीनी मिल चालू कराने और नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने की भी मांग की।
कहा कि सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने का नारा दे रही है, लेकिन डॉ. स्वामीनाथन की रिपोर्ट के अनुसार किसानों के उत्पाद के मूल्य में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर कीमत तय नहीं की गई है।
कहा कि जीएसटी से खाद 13 प्रतिशत, कृषि उपकरण 18 प्रतिशत महंगे हो गए। बीज, कीटनाशकों के दाम बढ़ गए। इससे उपज की लागत बढ़ गई।
आवागमन में घंटों बाधक बने रहे आलू
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किसान सभा द्वारा आलू गिराकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराने की वजह से घंटों आवागमन में अवरोध बना रहा। चार पहिया वाहन तो आलुओं को रौंदते हुए आगे निकल जा रहे थे। लेकिन बाइक और टेंपो को निकालने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। आलुओं से घंटों आवागमन को बाधित रखा।
हालांकि पुलिस आवागमन सुचारु कराने में जुटी रही। लोग जैसे ही लाखों की संख्या में गिरे आलू के पास पहुंच रहे थे, उन्हें पूछना पड़ रहा था कि अरे सड़क पर इतना आलू कैसे गिर गया। कहीं आलू लदा कोई वाहन तो नहीं पलट गया। जब लोगों द्वारा यह बताया जा रहा था कि यह आलू किसानों के आंदोलन की देन है, तो लोग हंसते हुए यह कहने लग रहे थे कि यह किसानों का सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध है।
सड़क पर इतनी बड़ी मात्रा में आलू गिरे हुए थे कि इनके बीच से लोगों को निकलने में एक बार सोचना पड़ रहा था। बाइक सवार आलुओं के सामने आते ही वाहनों का ब्रेक लगा दे रहे थे और इस सोच में पड़ जा रहे थे कि कैसे निकले।
कई बाइक सवारों ने ऐसा सोचा कि ये आलू आवागमन में क्या बाधक बनेंगे। ऐसे लोगों ने जैसे ही तेज रफ्तार से बाइक निकालना चाहा है, बाइक फिसलने लगी। कई बाइक और पैदल वाले जहां, फिसलकर गिर गए। वहीं अधिकांश लोगों ने पैदल जद्दोजहद करते हुए बाइकों को निकाला।
...और आलू बटोरने में जुट गए लोग
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कचहरी के आसपास के लोगों को जैसे ही यह जानकारी हो रही थी कि किसानों ने सरकार का विरोध करते हुए सड़क पर आलू गिरा दिया है और मवेशियों को छोड़ने के लिए लाए, वह मौके लिए रवाना हो जा रहे थे। आलू गिराने के बाद किसानों को सरजू पांडेय पार्क में जाते ही आसपास के लोगों ने झोला, बोरा, गमछा आदि में आलुओं को बटोरना शुरू कर दिया। घंटों लोगों द्वारा आलू बटोरने का कार्य जारी रहा। हालांकि लाखों आलू वाहनों के पहिया के नीचे दबकर मलबे में तब्दील हो गए, जिसे जेसीबी से उठाया गया।
किसान एक ट्रक और कई छोटे वाहन पर दर्जनों मवेशियों को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने छोड़ने के लिए लाए थे। इसकी जानकारी होते ही सदर एसडीएम विनय कुमार और सदर कोतवाल राजीव सिंह बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए। जैसे ही किसान मवेशियों को छोड़ने के लिए ट्रक पर चढ़े, वैसे ही प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी किसानों से मवेशियों को न छोड़ने का अनुनय-विनय करने लगे। इस पर किसानों ने मवेशियों को नहीं छोड़ा और वाहनों सहित उन्हें लेकर धरना स्थल चले गए।