जिले में जब कोरोना ने पैर जमाना शुरू किया था, तब प्रवासी लगातार महानगरों से अपने गांव आ रहे थे। कोरोना को रफ्तार देने में इनकी भूमिका रही है। प्रवासियों की माने तो लाकडाउन शुरु होने व महामारी फैलने के बाद काम धंधों पर ताला लग गमा। सब कुछ बंद होने के बाद अब एक ही रास्ता था अपने घर को लौटना।
अब बेरोजगारी व आर्थिक तंगी की वजह से फिर से वापस शिफ्ट होना चाहते हैं। 30 फीसदी लोग महानगरों में जा चुके हैं। घर रह कर आने के बाद से वो काफी तनाव में हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग अभी परिवार गांव में छोड़कर गए हैं।
कुछ लोग महानगरों में वापस नहीं जाना चाह रहे थे। लेकिन भुखमरी व घरवालों की जिद के बाद उन्होंने फिर से जाना जरूरी समझा। पैसे के अभाव में घर में रखे सामान कीमती आभूषण और दूसरी वस्तुएं भी धीरे-धीरे बिक चुकी हैं। लोग पूरी तरह से बिखर चुके हैं।
उधर जनपद में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए नगर सहित ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल कायम है। पहले से शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, उद्योग विभाग राजस्व विभाग के साथ ही अब स्वास्थ्य महकमा भी संक्रमण की चपेट में आ गया है। ऐसे में आम लोगों की सुरक्षा, इलाज तथा जांच कहीं न कहीं प्रभावित होना तय है। अब देखना है कि स्वास्थ्य महकमा इस चुनौती का सामना कैसे करता है?