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GDP: 1.40 लाख में 63% इकाइयां युवा उद्यमियों की, इन्हीं के दम पर बनारस बन रहा सूक्ष्म उद्योगों का हब

Thu, 11 Sep 2025 02:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में एमएसएमई से युवा जुड़ रहे हैं। युवा उद्यमी कारोबार में निवेश भी कर रहे हैं। नौकरी की बजाय स्वरोजगार और उद्यमिता की राह चुना जा रहा है।
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जीडीपी में वृद्धि। - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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Varanasi News: वाराणसी की जीडीपी में युवा उद्यमी भी योगदान दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, जिले में एमएसएमई की कुल 1.40 लाख इकाइयों में से 88,397 इकाइयां सूक्ष्म उद्योगों से जुड़ी हैं। इसमें युवाओं की रुचि सर्विस सेक्टर में अधिक दिखाई दे रही है।

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युवा उद्यमी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर उद्योगों में निवेश कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी, लोन सुविधा और स्टार्टअप पॉलिसी ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया है। यही वजह है कि युवा अब नौकरी की बजाय स्वरोजगार और उद्यमिता की राह चुन रहे हैं। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

जिले में छोटे उद्योग जैसे रेस्टोरेंट, बेकरी शॉप, डेयरी उत्पाद, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और ई-कॉमर्स सेवाएं तेजी से शुरू रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्विस सेक्टर में निवेश की लागत कम होती है और रोजगार सृजन की क्षमता अधिक, यही कारण है कि युवा इसे प्राथमिकता दे रहे हैं। 

कच्चे माल और जमीन की बढ़ती कीमत से बढ़ रहा खर्च : स्माॅल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने बताया कि कच्चे माल और जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है। पूंजी का आधे से अधिक हिस्सा जमीन खरीदने और यूटिलिटी स्थापित करने में खर्च हो जाता है। जिसके कारण युवा वर्ग अब सर्विस की ओर आकर्षित हो रहा है।

सूक्ष्म इकाइयों में अधिकतम एक करोड़ का निवेश
एमएसएमई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 49,808 कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रजिस्टर्ड हैं, जबकि सर्विस सेक्टर में 88,397 इकाइयों का पंजीकरण है। वहीं लघु उद्योग में मात्र 1410 और मध्यम में 85 इकाइयां पंजीकृत हैं। 

इससे स्पष्ट होता है कि युवाओं का झुकाव उत्पादन आधारित उद्योगों की अपेक्षा सेवाओं पर आधारित उद्योगों की ओर अधिक है। दरअसल सूक्ष्म इकाइयों के अधिकतम निवेश की सीमा एक करोड़ रुपये और सालाना टर्नओवर पांच करोड़ निर्धारित है। वहीं लघु उद्योग में 10 करोड़ की लागत और 50 करोड़ टर्नओवर का लक्ष्य है।
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श्रेणी सर्विस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां
सूक्ष्म 88397 49808 138205
लघु 1050 360 1460
मध्यम 55 30 85
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