जिले में छोटे उद्योग जैसे रेस्टोरेंट, बेकरी शॉप, डेयरी उत्पाद, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और ई-कॉमर्स सेवाएं तेजी से शुरू रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्विस सेक्टर में निवेश की लागत कम होती है और रोजगार सृजन की क्षमता अधिक, यही कारण है कि युवा इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।
कच्चे माल और जमीन की बढ़ती कीमत से बढ़ रहा खर्च : स्माॅल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया ने बताया कि कच्चे माल और जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है। पूंजी का आधे से अधिक हिस्सा जमीन खरीदने और यूटिलिटी स्थापित करने में खर्च हो जाता है। जिसके कारण युवा वर्ग अब सर्विस की ओर आकर्षित हो रहा है।
सूक्ष्म इकाइयों में अधिकतम एक करोड़ का निवेश
एमएसएमई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 49,808 कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रजिस्टर्ड हैं, जबकि सर्विस सेक्टर में 88,397 इकाइयों का पंजीकरण है। वहीं लघु उद्योग में मात्र 1410 और मध्यम में 85 इकाइयां पंजीकृत हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि युवाओं का झुकाव उत्पादन आधारित उद्योगों की अपेक्षा सेवाओं पर आधारित उद्योगों की ओर अधिक है। दरअसल सूक्ष्म इकाइयों के अधिकतम निवेश की सीमा एक करोड़ रुपये और सालाना टर्नओवर पांच करोड़ निर्धारित है। वहीं लघु उद्योग में 10 करोड़ की लागत और 50 करोड़ टर्नओवर का लक्ष्य है।