गणेशोत्सव के तीसरे दिन भी शहर के पूजा पंडालों में भगवान गणेश की विधि विधान से पूजन के साथ ही आरती भी उतारी गई। कहीं दूर्वा तो कहीं किशमिश से गणपति की आराधना हुई। विविध प्रतियोगिताएं भी हुईं। संस्कृति ज्ञान, सामान्य ज्ञान के साथ ही मेहंदी प्रतियोगिताओं में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
दशाश्वमेध राधा कृष्ण मंदिर में श्री गणेश उत्सव सेवा समिति की ओर से आयोजित उत्सव में उदय कंठाले के निर्देशन में पूजा हुआ। शाम को भारत संस्कृति ज्ञान प्रतियोगिता हुई। इसमें कनिष्ठ वर्ग में हर्षवर्धन केशरी व स्वास्तिक पाठक, वरिष्ठ वर्ग में शिवांश शेखर सिंह और यश भालेराव को प्रथम स्थान मिला। लोकमान्य सार्वजनिक श्री गणेशोत्सव के रजत जयंती वर्ष के तीसरे दिन के रजत प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन हुआ। गणेश जी का शृंगार सहस्त्र दूर्वा से हुआ।
आसभैरो स्थित अग्रवाल भवन में श्री काशी मराठा गणेश उत्सव समिति की ओर से पांच दिवसीय श्रीगणेश उत्सव समारोह के दूसरे दिन लालबाग का राजा का शृंगार हुआ। मोदक का भोग लगाया गया और महाआरती सकलडीहा के विधायक प्रभु नारायण सिंह ने की। शाम को बच्चों के लिए मेहंदी प्रतियोगिता, कौन बनेगा लखपति (प्रश्न मंच) आयोजित किया गया।
उधर शारदा भवन में गणपति दरबार संगीतमय हो उठा। डॉ. शेफाली मुखर्जी ने रागपुरिया धनाश्री के बाद विलंबित एक ताल में अब तो रुत मान .....गाकर गणपति को रिझाया। शेफाली ने राग पीलू में दादरा अब लागे ना जियरा हमार ...पेश किया। दूसरे चरण में डॉ.राजेश शाह ने सितार की मधुर झंकार से सभी को आह्लादित कर दिया। आखिरी क्रम में डाॅ. अर्चना म्हस्कर ने श्रोताओं को राग यमन में विलंबित एक ताल में पल-पल पे ....सुनाया।