मस्जिद कमेटी का दावा है कि गंज शहीदा मस्जिद का इतिहास करीब एक हजार वर्ष पुराना है और यह रेलवे के अस्तित्व में आने से बहुत पहले से यहां मौजूद है। कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि वे मस्जिद से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज और साक्ष्य प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। साथ ही मामले के कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है।
शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद परिसर में दो हजार से अधिक नमाजी एकत्र हुए। नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, हालांकि मस्जिद को लेकर चल रही चर्चाओं और नोटिस के कारण लोगों में उत्सुकता बनी रही। स्थानीय प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
गौरतलब है कि रेलवे प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया है। नोटिस जारी होने के बाद से विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की भी इस पर नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण पर टिकी हैं।