काशी के कुंड-तालाब पाटने से कम हुई वाटर रिचार्जिंग
जानकारों के अनुसार काशी कुंड और तालाबों का शहर कहा जाता है। यहां कुंड और तालाब को पाटने से वाटर रिचार्जिंग कम हुई है। सामान्य बारिश पर पर्याप्त पानी मिल जाता है। शहरी क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने की वजह नदी आधारित सरकारी पेयजल योजनाओं का फेल होना है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहरों के अभाव के कारण भूगर्भ जल से ही सिंचाई हो रही है। 20 लाख की शहरी आबादी के साथ ही कल-कारखानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूगर्भ जल का अतिदोहन ही किया जा रहा है।
संकटमोचन मंदिर के महंत का एक्स पर पोस्ट
गंगा की घटते जलस्तर पर चिंता जताते हुए संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि वाराणसी में गंगा का जलस्तर दो दिन में आधा फीट घटा है। गर्मियों का ये सबसे कम जलस्तर है। कल से बारिश शुरू होनी चाहिए।
जिले के स्थान - मीटर में भूगर्भ जलस्तर
| भोजूबीर |
17.38 |
| सारनाथ |
16.90 |
| लक्सा |
17.01 |
| लंका |
17.27 |
| आराजीलाइन ब्लाक |
17.75 |
| बड़ागांव ब्लाक |
13.63 |
| चिरईगांव ब्लाक |
16.88 |
| चोलापुर ब्लाक |
13.30 |
| हरहुआ ब्लाक |
17.73 |
| काशी विद्यापीठ ब्लाक |
13.91 |
| पिंडरा ब्लाक |
17.98 |
| सेवापुरी ब्लाक |
15.31 |
यह बोले अधिकारी
वर्तमान में गंगा का जलस्तर 189 फीट है। ये पहली बार है जब जलस्तर इतना कम हुआ है। इसके लिए कानपुर रामगंगा को पत्र भेजकर पानी छोड़ने का आग्रह किया गया है। वर्तमान में 100 से 110 एमएलडी पानी गंगा से उठा रहे हैं जबकि सामान्य दिनों में 125 एमएलडी पानी लिया जाता है। बाकी आपूर्ति के लिए शहर के ट्यूबवेल का सहारा लिया जा रहा है। - ओपी सिंह, सचिव जलकल