जलस्तर में कमी से सामनेघाट के पास मध्य धारा में भी जगह जगह रेत के टीले उभर आये हैं
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गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट से काशी में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। हर दिन जलस्तर एक सेंटीमीटर नीचे खिसक रहा है। पिछले 27 दिन में 27 सेंटीमीटर की गिरावट के साथ जलस्तर अब तक के न्यूनतम स्तर 57.52 मीटर पर आ पहुंचा है। पिछले साल इसी तारीख क्रो जलस्तर तकरीबन एक मीटर अधिक था।
जलप्रवाह न होने से नदी में प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है वहीं, जगह-जगह बालू के टीले तेजी से विस्तार ले रहे हैं। गंगा में जल छोड़ने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों से केंद्रीय मंत्रियों तक के आश्वासन और प्रयासों का अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार काशी में स्थिति यह है कि गंगा हर दिन एक सेंटीमीटर नीचे जा रही हैं। गंगा का जलस्तर अब तक के न्यूनतम स्तर पर है। जलस्तर लगातार सिमटने से प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने के साथ ही जलचरों पर भी संकट छाने लगा है।
कई जगहों पर नदी के मध्य तक रेत के टीले विस्तार ले रहे हैं। महीने भर पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने जल्द से जल्द जल छोड़वाए जाने का भरोसा दिलाया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। गंगा की उम्मीदें केवल मानसून पर टिकी हैं।
ये है जिलों की स्थिति
जिला - जल स्तर (मीटर में)
फाफामऊ- 75.7
इलाहाबाद - 71.06
सीतामढ़ी- 74.76
मिर्जापुर- 62.79
वाराणसी- 57.52
गाजीपुर- 51.44
बलिया- 48.24
न पत्र और न आश्वासन आया काम
घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होने से जलचरों पर भी संकट
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पिछले महीने यहां दौरे पर आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से जलकल विभाग के अधिकारियों ने गंगा के जलस्तर में कमी की समस्या बताई थी। इससे जलापूर्ति में आ रही दिक्कतों की जानकारी दी थी।
आग्रह किया था कि कानपुर बैराज, नरौरा बांध या फिर उत्तराखंड से गंगा में पानी छोड़वाने के लिए आग्रह किया था। वहीं डीएम योगेश्वर राम मिश्रा नेे भी 26 अप्रैल को प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर शहर के धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्ता का जिक्र करते हुए गंगा में पानी छोड़ने का आग्रह किया था।
उसके बाद यहां आए केंद्रीय मंत्री नितिन मंत्री ने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही मई के अंतिम सप्ताह तक पानी छोड़ दिया जाएगा लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ।
दो की जगह तीन पंपों से भर रहा टैंक
जलापूर्ति के लिए भदैनी में पांच पंप लगाए गए हैं, वहीं 80 मीलियन लीटर का टैंक बनाया गया है। इस टैंक को सामान्य दिनों में दो पंप चलाकर ही भर दिया जाता है, लेकिन गंगा का जलस्तर कम होने और गर्मी के चलते पानी की खपत बढ़ने से इस समय तीन पंप चलाए जा रहे हैं।
जलकल के जीएम बीके सिंह ने बताया कि भूजल स्तर खिसकने और गंगा का जलस्तर कम होने के चलते मुश्किलें बढ़ गई हैं। नलकूपों में अतिरिक्त पाइप जोड़कर किसी तरह उन्हें चलाया जा रहा है। वहंीं गंगा से 115 एमएलडी पानी प्रतिदिन लिफ्ट किया जा रहा है।
तपती धूप में पानी बिन परेशानी
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तपती धूप के बीच भूजल स्तर में गिरावट से शहर में पेयजल का संकट और बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि रिजर्व में रखे गए पंपों को चलाकर गंगा से 100 एमएलडी की जगह 115 एमएलडी पानी लिफ्ट किया जा रहा है। बावजूद इसके पानी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
जलापूर्ति से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक गर्मी के चलते पानी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में 50 एमएलडी से अधिक बढ़ी है। वहीं, गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट के साथ ही शहर का भू-गर्भीय जलस्तर भी खिसक रहा है। इसके चलते पचास फीसदी से अधिक नलकूप अपनी क्षमता के अनुरूप पानी नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, दो-तिहाई हैंडपंपों से भी पानी निकलना बंद हो गया है।
गंगा के जलस्तर में आई रिकार्ड गिरावट से शहर का भू-जल स्तर भी प्रभावित हुआ है। इसका सबसे अधिक असर हैंडपंपों और नलकूपों से होने वाली जलापूर्ति पर पड़ा है। शहर में मौजूदा समय पानी की जरूरत 350 एमएलडी तक पहुंच गई है जबकि सामान्य दिनों में यह 300 एमएलडी होती है।
210 एमएलडी जलापूर्ति नलकूपों के जरिए और 100 एमएलडी जलापूर्ति गंगा से पानी लिफ्ट कर की जाती है लेकिन मौजूदा समय पचास फीसदी नलकूपों के पूरी क्षमता से न चल पाने के चलते जलापूर्ति पर तगड़ा असर पड़ा है।
इसके मद्देनजर गंगा से रोजाना अब 115 एमएलडी पानी लिफ्ट कर सप्लाई की जा रही है। इसके लिए रिजर्व में रखे गए पंप भी लगा दिए गए हैं। बावजूद इसके पानी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
ये है वर्तमान में पेयजल की स्थिति
- 20 लाख लोगों की बुझती है प्यास
- 325 एमएलडी पेयजल की शहर को आवश्यकता
- 115 एमएलडी पानी गंगा से होता है लिफ्ट
- 5 बड़े पंपों से भदैनी के समीप पानी होता है लिफ्ट
- 80 मीलियन लीटर पानी स्टोर करने की क्षमता
- 210 एमएलडी पानी नलकूपों से मिलता है।