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गंगा सप्तमी: आरपार की चढ़ाई 500 मीटर लंबी चुनरी और माला, आरती में हुई विशेष पूजा; गंगा सेवी सम्मानित

Fri, 24 Apr 2026 02:03 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: गंगा सप्तमी के अवसर पर काशी में विभिन्न आयोजन हुए। मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। चुनरी शोभायात्रा यात्रा निकाल भक्तों को प्रसाद भी बांटे गए। देर शाम विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में विहंगम नजारा देखने को मिला।
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गंगा सप्तमी पर हुए विशेष आयोजन। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Ganga Saptami: भगवान शिव की जटा में विराजमान मां गंगा के उद्भव का उत्सव बृहस्पतिवार को गंगातट से श्रीकाशी विश्वनाथ धाम तक छाया रहा। भक्तों ने शोभायात्राएं निकाल कर मां गंगा का दुग्धाभिषेक, दीपदान और पूजा की। मां को आरपार की 500 मीटर की चुनरी और माला चढ़ाई। पांच गंगा सेवियों का सम्मान हुआ।

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गंगा सप्तमी पर गोष्ठी परिवार और गंगोत्री सेवा समिति की ओर से चित्तरंजन पार्क से चुनरी शोभायात्रा यात्रा निकाली गई। महिलाएं सिर पर कलश लिए बधाई गीत गाते चल रही थीं। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों और डमरुओं की निनाद के साथ गंगा मैया की जय..., हर-हर गंगे..., जय-जय गंगे... का जयघोष करते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा के दशाश्वमेध घाट तक पर पहुंचने पर गंगोत्री सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित किशोरी रामण दूबे के नेतृत्व में पुष्पवर्षा कर स्वागत हुआ। 

गंगा पूजन और दीपदान के बाद करीब 500 मीटर गंगा आरपार की माला व चुनरी चढ़ाई गई। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकरपुरी महाराज ने गंगा सेवा से जुड़े पांच गंगासेवियों को सम्मानित भी किया। शोभायात्रा में सुदामा तिवारी सांड बनारसी, डॉ. विनोद राव पाठक, श्यामलाल यादव, डॉ. गणेश दत्त शास्त्री, डॉ. रमेशदत्त पांडेय, डॉ. पवन कुमार शुक्ला, मंजीत त्रिपाठी, कन्हैया त्रिपाठी, शांतिलाल जैन, दिनेश शंकर दूबे आदि रहे।

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महामंडलेश्वर रूपोंमयी नंदगिरि ने की गंगा पूजा : वीरेश्वर मठ एवं श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर रूपोंमयी नंदगिरि माता के नेतृत्व में मां गंगा का पूजन हुआ। रूपोंमयी नंदगिरि ने कहा कि गंगा सप्तमी मां गंगा के अवतरण का प्रतीक है, जो मानव जीवन के उद्धार का मार्ग प्रशस्त करती हैं। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवनरेखा हैं, जिनकी आराधना से आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साधुओं को चादर ओढ़ाकर सम्मान किया। जलपान कराया गया।

विहान के रागों में गूंजा मां गंगा का महिमागान : सुबह-ए-बनारस के प्रभाती सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवा कलाकार दीक्षा मिश्रा के सुरों में मां गंगा की महिमा गूंजी। उन्होंने राग तोड़ी में विलंबित एकताल में निबद्ध रचना क बोल थे-चाप उठाई चढ़ाई...। तीन ताल में निबद्ध रचना के बोल थे- लंगर काकरिया जिन मारो...। भजन-चलो मां गंगा जमुना तीर... सुनाकर कर मां गंगा को वदन किया। स्वागत डॉ. रत्नेश वर्मा और प्रमोद मिश्रा, संचालन डॉ. प्रीतेश एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह ने किया।

ललिता घाट पर मां गंगा को साड़ी चढ़ाकर किया शृंगार
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से सुबह ललिता घाट पर मां गंगा का पूजन हुआ। अर्चकों, विद्वानों व श्रद्धालुओं ने शास्त्रोक्त विधान से मां गंगा की पूजा की। मां गंगा का गंगाजल, दुग्ध, पुष्प सहित विविध पूजन सामग्रियों से अभिषेक और पूजन हुआ। इसके बाद धाम परिसर में विराजमान मां गंगा के विग्रह की आरती हुई। शाम को न्यास की ओर से ललिता घाट पर गंगा आरती हुई। 

अर्चकों ने मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर षोडशोपचार पूजन किया। मां गंगा को साड़ी चढ़ाई। वहीं, धाम में सांस्कृतिक संध्या में तनु, प्रियंका ने भजन पेश किया। राहुल ने नृत्य नाटिका की प्रभावी प्रस्तुति दी। कोलकाता की मोऊ दत्ता और अश्मिता राय ने कथक की जुगलबंदी कर भक्ति रस बरसाया। वहीं, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट सहित सभी घाटों पर होने वाली आरतियों में मां गंगा की विशेष पूजा कर आरती हुई। 

श्रीश्याम झूलनोत्सव पर निकलेगी ध्वजा यात्रा और लगेगा 56 भोग
श्री श्याम मंडल वाराणसी का 55वां वार्षिकोत्सव श्री श्याम झूलनोत्सव महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में 15 व 16 अगस्त को धूमधाम से मनाएगा। श्रीश्याम मंदिर में हुई बैठक में अध्यक्ष दीपक तोदी ने बताया कि सावन में श्याम बाबा का झूलनोत्सव मनेगा। पहली बार श्याम प्रभु का दरबार स्वदेशी फूलों से सजेगा। श्रीश्याम ध्वजा यात्रा, छप्पन भोग, सुंदरकांड पाठ, भजन संध्या का आयोजन होगा। 

प्रचार मंत्री सुरेश तुलस्यान ने बताया कि सुंदरकांड का पाठ संजय पुजारी के नेतृत्व में होगा। सवामणि का भोग लगेगा। मारवाड़ी युवा मंच की महिलाओं का सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। संचालन मंत्री पवन कुमार अग्रवाल ने किया। इस मौके पर अजय खेमका, श्याम सुंदर गाड़ोदिया, पंकज तोदी, कृष्ण बजाज, संदीप शर्मा कानू, चंदन तोदी, श्याम बैजनाथ भालोटिया, राजेश तुलस्यान, विजय अग्रवाल, मदन पोद्दार आदि रहे।
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भारतीय संस्कृति को समझना और उसे अपनाना होगा : मंत्री दयाशंकर
बीएचयू के काशी कला कुंभ कार्यक्रम के समापन पर आए प्रदेश में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि काशी वास्तव में कला की राजधानी है। यहां कण-कण में कला रची-बसी है। काशी ने कला क्षेत्रों में कई महान हस्तियों को जन्म दिया है, जिससे भारतीय संस्कृति समृद्ध हुई है। हमें बाहरी संस्कृति को अपनाने से पहले अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति को समझना और उसे अपनाना चाहिए। पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता मनोज सिंह ‘टाइगर’ ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ही भविष्य के कलाकार तैयार होते हैं।
 
बीएचयू के छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन सिंह ने कहा कि कला विद्यार्थियों के ओवरऑल विकास की आधारशिला है, जो व्यक्तित्व को सुंदर और संवेदनशील बनाती है। संकाय प्रमुख डॉ. संगीता पंडित ने कहा कि यह आयोजन काशी की उस गौरवशाली परंपरा को फिर स्थापित करता है, जहां कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। 
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