काशी में मंगलवार को गंगा-जमुनी तहजीब के अलग तरह के रंग देखने को मिले। एक तरफ संकट मोचन रामभक्त हनुमान जयंती पर समूचा शहर केसरिया हो उठा तो दूसरी ओर मुसलिम समुदाय के लोगों ने मुश्किल कुशा (संकट मोचक) हजरत अली की जयंती मनाई।
एक ही दिन ये पर्व पड़ने पर सांप्रदायिक सौहार्द का रंग और चटख हो उठा। दोनों समुदाय के लोग आस्था से सराबोर रहे। संकट मोचन के दरबार के लिए सैकड़ों ध्वजा-पताकाओं, झांकियों के साथ निकली शोभायात्राओं से सड़कें केसरिया रंग में रंग गईं।
मुहल्ले-मुहल्ले से झांकियां निकाली गईं। उधर, मौला अली के जन्मदिन की खुशी में चारो धर्मों के धर्मगुरुओं ने जहां प्रेम और इंसानियत की वकालत की। जुलूस में तिरंगा लहराया और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे गूंजे...।
‘बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारो/ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु से जात न टारो...।’ वर्ष भर रामकाज के लिए खड़े रहने वाले संकट मोचन हनुमान की जयंती पर मंगलवार को बैठकी की झांकी सजाई गई।
बैठकी शृंगार के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा तो मंदिर परिसर में तिल रखने की जगह नहीं बची। शोभायात्राओं में आरती की थाल सजाकर महिलाएं कतारबद्ध होकर चलीं तो डांडिया नृत्य से युवक-युवतियों ने हर किसी का ध्यान खींचा। उधर, भिखारीपुर तिराहे से सुबह निकाली गई श्री हनुमान ध्वजा यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
सुसज्जित वाहन पर संकट मोचन की झांकी सजाई गई। रथों पर भगवान शिव, गणेश, हनुमान के विग्रहों की झांकियां निकाली गईं। 11 वैदिक विद्वानों ने महाआरती की। इसके बाद शोभायात्रा निकाली गई। मंगल ज्योति के साथ हनुमान पताका और 21 फीट ऊंचे हनुमान के स्वरूप की झांकी आकर्षण का केंद्र बन गई।
बैंड-बाजे के साथ 200 बटुकों की टोलियां ध्वजा लेकर चल रही थीं तो 21 युवा डमरू नाद कर रहे थे। राम दरबार की झांकी की छटा अलग मन मोह रही थी। 21 युवक-युवितयों के समूह डांडिया नृत्य से माहौल को खुशनुमा बना रहे थे। रास्ते भर फुहारों, पुष्पों की वर्षा होती रही। त्रिदेव मंदिर के सामने आरती उतारी गई। हाथी, घोड़े के साथ 1100 लाल पताका लिए श्रद्धालु चल रहे थे। मंदिर पहुंचने पर बैठकी की झांकी सजी।