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गंगा दशहरा: अवतरण के दिन भी काशी में रूठी गंगा, जल छोड़ने के लिए DM की चिट्ठी बेअसर

Thu, 24 May 2018 02:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होने से जलचरों पर भी संकट - फोटो : अमर उजाला
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काशी में गंगा दशहरा पर भी श्रद्धालुओं को स्नान के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। अपने अवतरण दिवस पर भी गंगा रूठी हुई हैं। भीषण तपिश के बीच जलस्तर में लगातार गिरावट से हालात बेहद चिंताजनक हैं।
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प्रवाह थमने के कारण बढ़ते प्रदूषण से स्थितियां ऐसी हैं कि अधिकतर घाटों पर जल आचमन और स्नान योग्य भी नहीं रह गया है। हालात को देखते हुए गंगा में जल छोड़ने के लिए महीने भर पहले जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शासन और सिंचाई विभाग को पत्र भेजा था लेकिन उसका भी कहीं कोई असर नहीं हुआ। 

जल न छोड़े जाने से गुरुवार को गंगा दशहरा पर हजारों श्रद्धालुओं को दिक्कतें होंगी। जलस्तर खिसकने से गंगा का पाट भी सिमटता जा रहा है। जल छोड़ने के लिए जिलाधिकारी की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद से जलस्तर में 40 सेंटीमीटर से ज्यादा का घटाव हुआ है लेकिन उसके बाद जल छोड़ने के लिए अब तक कोई पहल नहीं हुई है। नतीजतन, गंगा का जलस्तर आठ साल के न्यूनतम स्तर पर है। 
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गंगा दशहरा पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का रेला गंगा तटों पर उमड़ेगा। गंगा दशहरा पर बन रहे अद्भुत संयोग के बीच पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही दान करके पुण्य कमाने के लिए श्रद्धालु रात से ही काशी पहुंचने लगे है। इसके अलावा गंगा घाटों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मां गंगा की उत्पत्ति दिवस को मनाने की तैयारी की जा रही है। 
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जलस्तर में साल दर साल गिरावट

जलस्तर में कमी से सामनेघाट के पास मध्य धारा में भी जगह जगह रेत के टीले उभर आये हैं - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो साल दर साल गंगा के जलस्तर में गिरावट सामने आ रही है। 2015 में गंगा का न्यूनतम जलस्तर 58.67 मीटर था, जबकि 2016 में इसमें और गिरावट दर्ज हुई और गंगा का जलस्तर 58.52 मीटर रिकॉर्ड किया गया। 2017 में ये घटकर 58.27 मीटर रह गया। जबकि 24 अप्रैल 2018 को वाराणसी में गंगा का जलस्तर आठ सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया और वाटर लेवल 58.1 मीटर रिकॉर्ड हुआ। अब यह रिकॉर्ड भी टूट गया है। 22 मई 2018 को केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 57.84 मीटर रिकॉर्ड किया है, जो पिछले साल इसी तारीख को 58.33 मीटर दर्ज किया गया था। 

गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट आई है। भले ही जिला प्रशासन ने अपनी तरफ से सिंचाई सचिव को गंगा में जल छोड़ने के लिए पत्र लिखा हो लेकिन अब तक ऐसी कोई पहल हुई नहीं है। गंगा में किसी भी बांध या अन्य स्रोतों से पानी नहीं छोड़ा गया है। ऐसी स्थिति में मानसून आने तक जलस्तर में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा। 
- रविंद्र सिंह, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, केंद्रीय जल आयोग

 
गंगा बांधों में कैद हैं, आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया की तर्ज पर बस गंगा के पानी का दोहन हो रहा है। कोई ये नहीं सोच रहा कि गंगा को कैसे बचाएं। हर कोई बस गंगा को साफ करना चाह रहा है, जबकि हकीकत ये है कि गंगा में जब पानी ही नहीं रहेगा तो साफ किसको करोगे। 
- प्रो. यूके चौधरी, नदी विशेषज्ञ

गंगा अब रही कहां। वो तो अपनी कुछ सहायक नदियों और नालों के बल पर अपने वजूद के लिए लड़ रही हैं, इसकी वजह से काशी में रेत के टीले उभरते जा रहे हैं। ये बेहद चिंताजनक हालात हैं। गंगा में प्रवाह कायम रखने के लिए बांधों से जल छोड़ा जाना जरूरी है। 
- प्रो. बीडी त्रिपाठी, नदी वैज्ञानिक

 
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