निर्जला एकादशी तिथि 31 मई को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी या भीमसेनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी के व्रत से वर्ष भर के समस्त एकादशी के व्रत का फल मिल जाता है। ज्येष्ठ शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 30 मई को दिन में 1:09 बजे लगे और 31 मई को 1:47 बजे तक रहेगी।
इस दिन निर्जल एवं निराहार रहकर भक्तिभाव के साथ पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। व्रत का पारण दूसरे दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के बाद किया जाता है।