प्रो. सुभाष पांडेय बताते हैं कि इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि का प्रारंभ वृष लग्न में सुबह 04:30 बजे से 06:30 बजे तक होगा। यह स्नान और पूजा के लिए सबसे सटीक मूहुर्त है। विशेष बात यह है कि इस वर्ष 17 मई से अधिक मास (मलमास) लग रहा है। यदि ज्येष्ठ मास में अधिक मास हो, तो गंगा दशहरा का उत्सव उसी मास में मनाया जाता है, न कि शुद्ध मास में। धार्मिक दृष्टिकोण से अधिक मास में किए गए स्नान और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। स्नान और पूजन के बाद दान करने से मनोकामना की पूर्ति होती है।
प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि गंगा दशहरा के दिन दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यहीं पर ब्रम्हा ने अश्वमेध यज्ञ किया था। इसी कारण इस स्थान का महत्व विशेष रूप से बढ़ जाता है। इस दिन शुद्ध मन से स्नान कर गंगा स्तुति का पाठ कर गंगा का पूजन करना चाहिए। इससे मानसिक, शारीरिक पाप नष्ट होते हैं और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। जो व्यक्ति गंगा में स्नान करने नहीं जा सकते हैं, वह पास के किसी जलाशय में स्नान कर सकते हैं। यह भी गंगा में स्नान करने के समान फलदायी होता है।
पापमुक्ति और पुण्य प्राप्ति के सिद्ध मंत्र
गंगा स्नान के दौरान मंत्रों का उच्चारण न केवल मन को शुद्ध करता है, बल्कि जातक को विष्णु लोक की प्राप्ति में सहायक होता है। पद्म पुराण के अनुसार, स्नान करते समय निम्नलिखित मंत्रों का स्मरण करना चाहिए। मूल मंत्र: 'ओम नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गङ्गायै नमः' पाप मुक्ति हेतु: 'गंगा गंगेति यो ब्रूयाद् योजनानां शतैरपि, मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति।' (अर्थ: जो व्यक्ति सैकड़ों योजन दूर रहकर भी 'गंगा-गंगा' कहता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त होता है।)
अर्घ्य मंत्र: सूर्य और मां गंगा को जल अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करें:
"द्रवीभूतं परं ब्रह्म परमानन्ददायिनी, अर्घ्यं गृहाण में गंगे पापं हर नमोस्तुते।"