ब्रह्मराष्ट्र एकम विश्व महासंघ न्यास और गंगा आरती सेवा समिति की ओर से मां गंगा प्राकट्य उत्सव महोत्सव होगा। न्यास के अध्यक्ष डॉ. सचिंद्र नाथ जी महाराज ने बताया कि 56 परिवारों की ओर से मां गंगा को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। देश के 12 राज्यों, अमेरिका और काशी के विभिन्न संगठनों की ओर से 5100 साड़ियां अर्पित की जाएंगी।
मां गंगा को आरपार की चुनरी चढ़ाई जाएगी और 501 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंगा भगीरथ विश्वगुरु काशी सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही गंगा संरक्षण और सेवा कार्यों से जुड़े 14 गंगा सेवियों को भी सम्मानित किया जाएगा। संस्था के पदाधिकारी बाद में दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री को यह सम्मान सौंपेंगे।
काशी विश्वनाथ धाम, अन्नपूर्णा मंदिर, दशाश्वमेध, ललिता, अस्सी और पंचगंगा घाट सहित 10 से अधिक स्थानों पर स्थित गंगा मंदिरों में विशेष शृंगार और भोग लगाया जाएगा। वहीं, गंगा दशहरा पर गुड्डा-गुड़िया विवाह की पारंपरिक रस्म निभाकर उन्हें गंगा में प्रवाहित करने की परंपरा भी निभाई जाएगी।
गंगा दशहरा और बकरीद पर अभेद होगी सुरक्षा
गंगा दशहरा और बकरीद पर शहर की सुरक्षा अभेद होगी। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सिंह और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरी मीणा ने सोमवार को यातायात पुलिस लाइन में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पीस कमेटी की बैठक की। इस दौरान सुरक्षा कानून-व्यवस्था, यातायात व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, चिकित्सा सुविधा, घाटों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण एवं संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बनाए रखने पर चर्चा की गई।
अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा ने बताया कि विभिन्न सुपर जोन, जोन एवं सेक्टरों में विभाजित कर व्यापक पुलिस व्यवस्था लागू की गई है। प्रत्येक सुपर जोन की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रत्येक जोन की निगरानी एसीपी और प्रत्येक सेक्टर की निगरानी थाना प्रभारी स्तर से होगी। जल पुलिस की तीन मोबाइल पार्टी, बाढ़ राहत पीएसी की एक कंपनी, ड्रोन से निगरानी के लिए तीन ड्रोन टीम और एनडीआरएफ की चार मोबाइल पार्टियां बनाई गई हैं।
तीन डीसीपी समेत 2200 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा चार कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरएएफ भी तैनात होगी। आयोजकों व धर्मगुरुओं से अपील की गई कि पर्वों को आपसी भाईचारे एवं सौहार्द के साथ मनाते हुए प्रशासन का सहयोग करें। सभी धर्मगुरुओं ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया व गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को बनाए रखते हुए पर्वों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर सहमति जताई।