गंगा किनारे पूजन करते संत
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वाणी से पाप- कठोर वचन, झूठ बोलना, चुगली करना एवं वाणी द्वारा किसी के मन को दुखाना ये वाणी से होने वाले चार प्रकार के पाप हैं। मानसिक पाप जैसे दूसरे के धन को लेने का विचार करना, मन से किसी का बुरा सोचना और असत्य वस्तुओं में आग्रह रखना, ये तीन प्रकार के मानसिक पाप कहे गए हैं।
ये सभी दैहिक, वाणी द्वारा एवं मानसिक पाप, गंगा दशहरा के दिन पतितपावनी गंगा में स्नान से धुल जाते हैं। यह गंगा दशहरा का महत्व है। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों से मां गंगा को स्वच्छ बनाए रखने का निवेदन किया। इस दौरान पातालपुरी मठ के महंत बाबा बालक दास, दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेव, कर्णघंटा के महंत ईश्वर दास, महंत अवधेश दास, दर्जनों दंडी संन्यासी समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
गौरी केदारेश्वर का जलाभिषेक
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गंगा दशहरा पर गुरुवार को केदार घाट स्थित बाबा गौरी केदारेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया गया। गौरी केदारेश्वर देव दीपावली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक नंगा सेवा समिति केदार घाट के तत्वाधान में आयोजित जलाभिषेक समारोह का शुभारंभ समाजसेवी पर्यावरण प्रहरी रामयश मिश्र एवं संयोजक महेश तिवारी संयुक्त रूप से बाबा का कमल के फूल के साथ जलाभिषेक कर किया।
कार्यक्रम संयोजक महेश तिवारी ने बताया कि दो साल से कोरोना के कारण बाबा का जलाभिषेक गंगा दशहरा पर हम लोग नहीं कर पाए थे। आज मां गंगा के अवतरण दिवस पर उनके जल से बाबा का जलाभिषेक कर परम सुख की प्राप्ति हुई।