जल परिवहन के लिए गंगा में तीन मीटर गहरी और 45 मीटर चौड़ी लेन बनाई जाएगी। जलस्तर को बनाए रखने के लिए हर 100 किलोमीटर पर बैराज बनाने की योजना है। इलाहाबाद से हल्दिया तक निर्धारित इस जल मार्ग के बीच 11 मल्टी मॉडल टर्मिनल बनाए जाएंगे।
वाराणसी, हल्दिया और पटना को योजना के पहले फेज में शामिल किया गया है। वाराणसी से कोलकाता के बीच प्रमुख घाटों को सुंदर बनाया जाएगा। सभी मल्टी मॉडल टर्मिनल को सड़क और रेल मार्ग से भी जोड़ने की तैयारी है। रेलवे से समझौते के बाद इनलैंड वाटरवेज अथारिटी ऑफ इंडिया ने (आईडब्ल्यूएआई) योजना को मूर्त रूप देने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
हाल ही में दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री के जल परिवहन के सपने को अमली जामा पहनाने पर विस्तार से चर्चा हुई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वाराणसी से हल्दिया के बीच गंगा की गहराई बढ़ाने के लिए ड्रेजिंग इस तरह कराई जाएगी कि जल परिवहन के लिए 45 मीटर चौड़ाई में हर जगह कम से कम तीन मीटर गहराई मिल सके। इस लेन में दो बड़े जलपोत (8 से 17 मीटर तक चौड़े) आसानी से आ-जा सकेंगे। वाटरवे-1 इलाहाबाद से हल्दिया जलमार्ग की दूरी 1620 किलोमीटर है।
इसमें प्रत्येक सौ किलोमीटर पर बैराज बनाने पर भी सहमति बनी है। लगभग 16 बैराज बनाए जाएंगे। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से घाटों को आकर्षक बनाया जाएगा साथ ही यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना के पहले फेज पर छह हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस जलमार्ग के विकास में वर्ल्ड बैंक 42 सौ करोड़ रुपये देगा। इसके अलावा, निजी संस्थाओं की भी भागीदारी होगी।