दो दिन से जलस्तर में ठहराव के बाद गंगा में मंगलवार को फिर उफान आ गया। दोपहर बाद बढ़ाव की गति बढ़ने से निचले स्तरों की कई कॉलोनियों में फिर पानी घुसने लगा। इससे पचासों परिवारों को गृहस्थी समेट कर छतों पर शरण लेनी पड़ी तो कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। गंगा के वेग में इजाफा के कारण असि और वरुणा में पलट प्रवाह शुरू हो गया है। इससे लोग संकट में आ गए हैं। केंद्रीय जल आयोग ने देर शाम गंगा का जलस्तर 69.49 मीटर रिकार्ड किया। फिलहाल रात आठ बजे तक काशी में गंगा खतरे के निशान से 1.77 मीटर नीचे बह रही थीं।
गंगा के जलस्तर में बढ़ाव से काशी के तटवर्ती इलाकों में एकबारगी फिर जन जीवन प्रभावित हो गया है। दो दिन तक हुए घटाव के बाद पहाड़ों पर हुई बारिश के चलते सहायक नदियों से आई जलराशि से गंगा में यह बढ़ाव शुरू हुआ है। केंद्रीय जल आयोग ने मंगलवार को दो सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ाव होने की जानकारी की। फाफामऊ, इलाहाबाद, सीतामढ़ी, मिर्जापुर में भी गंगा बढ़ाव पर है। गंगा में बढ़ाव के बाद अस्सी घाट के सुबह-ए-बनारस के मंच की ऊपरी फर्श पर फिर पानी आ गया।
रामानुजनगर, सामने घाट, महेश नगर के कई घरों में पानी घुस गया है। इससे एक बार फिर तमाम परिवार सामान समेट कर छतों पर चले गए। सबसे अधिक दिक्कत अस्सी मुहल्ले की रामानुज नगर कॉलोनी की है। असि नदी में प्रलट प्रवाह होने से कॉलोनियों में पानी घुसने लगा है। उधर, वरुणा किनारे कोनिया, सरैया, नक्खीघाट, मीराघाट समेत कई इलाके बाढ़ के पानी से घिरे हैं। सैकड़ों घरों में फिर पानी आने से शक्कर तालाब, तीन पुलौवा समेत कई बस्तियों के लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। इसी रफ्तार से बढ़ाव जारी रहा तो गंगा जल्द ही खतरे के निशान तक पहुंच सकती हैं।