प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गुरुवार को यहां गंगा और वरुणा की सफाई का अपना नया मॉडल बताया। मंडलायुक्त कार्यालय में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक में पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि नदियों की स्वच्छता के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। गंगा और वरुणा में गिरने वाले खुले नाले-नालियों पर तो रोक लगाएं ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी भी अब नदियों में नहीं बहाया जाए। इसे एक बड़ा तालाब बनाकर एकत्र करें और वहां से आसपास के गांवों में सिंचाई के लिए यह पानी उपलब्ध कराया जाए। जल्द से जल्द इसकी पूरी कार्ययोजना तय करने के निर्देश दिए। साथ ही, वरुणा और असि का नए सिरे से सीमांकन कराकर उनका पुनरोद्धार कराने का निर्देश दिया।
मंत्री ने उच्चाधिकारियों से दो टूक कहा कि गंगा और वरुणा में गिरने वाले नालों को जल्द से जल्द रोकें। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कराएं। सभी नाले-नालियों को पाइप लाइन के जरिये बनने वाले तालाब से जोड़ा जाए। नदियों में प्रदूषण कम होने पर उनके प्रवाह को निरंतर बनाए रखने में मदद मिलेगी। मंत्री ने जब गंगा सफाई के मुद्दे पर अधिकारियों से जानकारी मांगी तो पता चला कि गंगा में 23 और वरुणा में 14 नाले गिर रहे हैं। इस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि करोड़ों रुपये गंगा और वरुणा की सफाई के लिए आ रहे हैं।
बावजूद इसके धार्मिक शहर की यह बदहाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन पर मुकदमा भी दर्ज कराया जाए। मंत्री ने वरुणा और असि का पुनरोद्धार कराने का निर्देश दिया। कहा कि इन नदियों की सीमाओं का चिह्नांकन जल्द कराया जाए।
वरुणा नदी में प्रवाह बरकरार रखने के लिए ज्ञानपुर पंप कैनाल से पानी भरने का निर्देश दिया। सिंचाई विभाग के अभियंताओं को ताकीद की कि नहरों की सफाई और वरुणा में पानी छोड़ने का काम समय से पूरा कराएं। वरुणा में प्रवाह निरंतर बना रहे, यह सुनिश्चत किया जाए। बैठक में पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह, प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल, आईजी अमरेंद्र कुमार सेंगर, कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीआईजी एसके भगत, डीएम राजमणि यादव, एसएसपी आकाश कुलहरि आदि मौजूद थे।