नूतन बालक गणेशोत्सव समाज सेवा मंडल की ओर से 112वें गणेशोत्सव के अवसर पर भगवान गणेश की छठी मनाई गई। इस अवसर पर सूक्ष्म श्री गणेश जी झूले पर विराजमान हुए और पूरे मंदिर परिसर को सुगंधित पुष्प और पत्तियों से सजाया गया। कलाकारों ने भी देर रात हुए आयोजन में गीत, संगीत और नृत्य के जरिए श्रद्धा निवेदित की।
बृहस्पतिवार को वेदमूर्ति वीरेश्वर नारायण दातार के आचार्यत्व में श्वेतांक योगेश सप्तर्षि ने काजू से व पंडित हेमंत जोशी ने लावा से गणेश जी का षोडशोपचार पूजन तथा सहस्रानामार्चन किया। अपराह्न महिलाओं द्वारा ऑनलाइन भजनों की प्रस्तुति की गई। इसके उपरांत ऑनलाइन प्रतियोगिता का सिलसिला आरंभ हुआ। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार हेमा लेले, द्वितीय पुरस्कार विजेयता व तृतीय पुरस्कार रागेश्री पराशर ने प्राप्त किया।
शाम को अथर्ववेद के विद्वानों ने वसंत पूजा संपन्न कराई। ऑनलाइन संगीत सम्मेलन में प्राप्ति पुराणिक ने राग भीम की प्रस्तुति दी। विलंबित एक ताल, मध्य लय अद्धा ताल एवं द्रुत तीन ताल में बंदिशें प्रस्तुत की। प्राप्ति ने अपने गायन का समापन झूला से किया। तत्पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय के स्नातकोत्तर छात्र सोनू बनारसी ने बांसुरी वादन पेश किया। उन्होंने राग चंद्रकौंस की सुमधुर प्रस्तुति दी। अंतिम प्रस्तुति प्रतिष्ठा पुराणिक ने भरतनाट्यम शैली में भगवान गणेश को नृत्यांजली से दी। प्रतिष्ठा ने गणेश पुष्पांजलि, अलारिपु, विष्णु स्तुति, मराठी अभंग, मीरा भजन आदि प्रस्तुत किए।