पुत्र की दीर्घायु की कामना के लिए किए जाने वाले गणेश चतुर्थी व्रत रविवार को है। पर्व के मद्देनजर महिलाओं ने बाजार से पूजन सामग्रियों की खरीदारी की। माघ कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को पुत्र की दीर्घायु व आरोग्य के लिए महिलाएं प्रत्येक वर्ष गणेश भगवान का व्रत रखती हैं।
इस दौरान व्रती महिलाएं पूरे दिन उपवास रख शाम को स्नान करने के बाद गणेश जी के प्रतिमा के सामने विधि-विधान से पूनज-अर्चन करेंगी। इस पूजन में गणेश जी को विशेष कर काले तिल का लड्डू एवं ऋतु फल चढ़ाने का विधान है।
पूजन एवं चंद्रोदय के उपरांत चंद्रमा को व्रती महिलाएं अर्घ्य देकर अपने से बड़ों को प्रणाम कर आशीर्वाद लेती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के करने से जहां सभी प्रकार के दु:ख दूर होते हैं। व्रती को सभी भौतिक सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
वहीं चंद्रमा को अर्घ्य देने से दैविक, दैहिक एवं भौतिक तीनों प्रकार के ताप दूर होते है। गणेश चतुर्थी व्रत रखने वाली महिलाएं रविवार की रात 8:33 बजे के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देंगी।