वाराणसी पहुंचे जी-20 के मेहमान
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जी-20 के सम्मेलन देश के 60 शहरों में होने हैं। 200 बैठकें होंगी। 100वां सम्मेलन काशी में होना गौरव की बात है। इसमें कृषि के क्षेत्र में विकास से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा होगी। अब तक हुए सम्मेलनों में 110 अलग-अलग देशों से 12,300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। पूरे विश्व की 85 फीसदी जीडीपी और 75 फीसदी व्यापार जी 20 देशों में होता है।
डॉ. हिमांशु पाठक ने बताया कि सम्मेलन में आने वाले मेहमान अलग-अलग सत्रों में चर्चा के दौरान काशी की धरोहरों को भी जानेंगे। पहले दिन गंगा आरती देखेंगे। मेहमान नमो घाट से क्रूज पर सवार होंगे और सिंधिया घाट होते हुए दशाश्वमेध घाट पहुंचेंगे। घाट और क्रूज पर लोकनृत्य कहरवा, बमरसिया की प्रस्तुति होगी। 18 अप्रैल को उन्हें सारनाथ ले जाया जाएगा। यहां उन्हें धमेख स्तूप सहित अन्य ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू कराया जाएगा। सब म्यूजियम व लाइट एंड साउंड शो देखेंगे, फिर बुद्धा थीम पार्क में सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेंगे।
वाराणसी में की गई सजावट
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आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने बताया कि काशी से ही महर्षि यानी मिलेट्स एवं आदर्श एनसिएंट ग्रेन इंटरनेशनल रिसर्च इनिसिएटिव का प्रस्ताव रखा जाएगा। तीन दिवसीय सम्मेलन में मोटे अनाज को आधार बनाकर महर्षि प्रस्ताव पर सभी देशों के कृषि वैज्ञानिक चर्चा करेंगे। फूड सिक्योरिटी, डिजिटल एग्रीक्लचर, पीपीपी मॉडल पर भी मंथन किया जाएगा। संभावना है कि जी 20 के देश इसे अपनाने के लिए आगे आएंगे। सैद्धांतिक रूप से अगर सहमति बनी तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा।