निष्कर्ष दस्तावेज और अध्यक्ष के संक्षिप्त बयान के पैराग्राफ 10 और 11 में उल्लेख किया गया है कि ज्यादातर सदस्यों ने यूक्रेन युद्ध की कड़े शब्दो में निंदा की। सदस्यों ने जोर देकर कहा कि यह अत्यधिक मानवीय पीड़ा पैदा कर रहा है, यह देखते हुए कि 'आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए', यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संघर्ष पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कही थी।
इसमें आगे कहा गया है कि बैठक में यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हुई और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त महासभा के इससे संबंधित प्रस्तावों का हवाला दिया गया। यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की निंदा की गई और यूक्रेनी क्षेत्र से बिना शर्त और पूरी तरह से रूस के हटने की मांग की गई।
पैराग्राफ 11 में यह भी कहा गया है कि परमाणु हथियारों के उपयोग या उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है। साथ ही संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और संकटों को दूर करने के लिए कूटनीति प्रयास और संवाद को महत्वपूर्ण बताया गया है। गौरतलब है कि नई दिल्ली में जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों और रूस के बीच तकरार के चलते संयुक्त बयान नहीं जारी किया जा सका था।
मीडिया ब्रीफिंग में जयशंकर ने कहा, हर प्रतिनिधिमंडल ने अपने हित के लिए बात की और अपना दृष्टिकोण रखा। मैं इसमें नहीं पड़ूंगा कि किसने किसका समर्थन किया और किसने किसका समर्थन नहीं किया। सबसे उचित बात तो यह है कि सभी ने खुद के लिए बात की। उन्होंने आगे कहा, अध्यक्ष के रूप में मेरा काम एक समान तत्वों को ढूंढना और उन्हें एक साथ रखना था और यही वह दस्तावेज है जो आपके सामने है।