11 जून को लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विदेशी मेहमानों का काशी की आतिथ्य परंपरा के अनुसार स्वागत होगा। डमरुओं की नाद, बुंदेलखंड की पाई डंडा नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी। तरना में कर्मा लोकनृत्य भारत की अनादिकालीन विरासत की याद दिलाएगा। शहर में प्रवेश के साथ ही शिवपुर तिराहे पर विदेशी आगंतुक पूर्वांचल के प्रसिद्ध धोबिया लोकनृत्य का लुत्फ उठाएंगे। नदेसर स्थित पांच सितारा होटल में उनका स्वागत बुंदेलखंड के लोकनृत्य राई और पूर्वांचल के फरुवाही लोकनृत्य से होगा।
12 जून को नमो घाट पर मेहमानों का स्वागत मशहूर ढोल नृत्य बमरसिया से होगा। साथ ही कहरवा लोकनृत्य का भी आयोजन किया जाएगा। ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में प्रदेश की शिल्पकारी का अवलोकन करने के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए थारू लोकनृत्य और ढेडिया लोकनृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।
होटल ताज में दोबारा आगमन पर ब्रिटिश बैगपाइपर की तर्ज पर उत्तराखंड की मस्कबीन की सुमधुर ध्वनि से स्वागत होगा। होटल में डिनर के दौरान बांसुरी, वायलिन और तबले की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां होंगी। इस दौरान थीम बेस्ड क्लासिकल डांस का भी आयोजन किया जाएगा। 13 जून को सारनाथ स्थित संग्रहालय में विदेशी अतिथियों का स्वागत हुड़क मजीरा और मयूर लोकनृत्य से किया जाएगा।