वाराणसी में 28 और 29 मार्च को होने जा रहे जी-20 देशों के फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप (एफडब्ल्यूजी) के दो दिवसीय सम्मेलन से यहां पर्यटन और उद्योग को नए पंख लगेंगे। विश्व के राजनीतिक मानचित्र पर वाराणसी के इस उदय को मोदी इफेक्ट के रूप में देखा जा रहा है।
जी-20 जैसे विश्व के शीर्ष समूह के एफडब्ल्यूजी के सम्मेलन के यहां आयोजन का सीधा असर पर्यटन और उद्योग पर पड़ेगा। विशेषज्ञ इसे न सिर्फ वाराणसी बल्कि समूचे पूर्वांचल के लिए एक नई संभावना के तौर पर देख रहे हैं।
देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में जी-20 के प्रतिनिधि मंगलवार को वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते नजर आएंगे। नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने बताया कि सम्मेलन के अलावा प्रतिनिधियों के गंगा में नौका विहार और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती देखने का कार्यक्रम है।
वे इलाहाबाद और आसपास के जिलों का भ्रमण भी कर सकते हैं। पर्यटन मामलों के जानकार राहुल मेहता कहते हैं कि सम्मेलन का सीधा उद्देश्य जी- 20 के बहाने इस क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाओं की ब्रांडिंग है।
पहली बार बनारस जैसे शहर में इस आयोजन के पीछे कारण पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र होना है। उद्यमी अशोक गुप्ता उद्योग धंधों के लिए इस सम्मेलन को शुभ संकेत मानते हैं।
वहीं इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने कहा कि यह बेहतरीन पहल है। इस सम्मेलन के जरिए विश्व के राजनीतिक मानचित्र पर बनारस की चमक देखने को मिलेगी। बनारस विश्व भर की मीडिया के केंद्र में होगा। यहां पर्यटन और उद्योग की नई संभावनाएं बनेंगी।
जर्मनी की अध्यक्षता में यह ग्रुप की तीसरी बैठक है। इससे पहले बर्लिन और रियाद में इस तरह की बैठक हो चुकी है। विकास की राह में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए दुनियाभर के देशों के पास क्या विकल्प है, इस पर खास तौर से चर्चा होगी।
जी-20 देशों के एजेंडे में शामिल समावेशी विकास पर भी रोडमैप तैयार होगा। हर देश के हिसाब से अलग-अलग समावेशी विकास के तरीके सुझाए जाएंगे। बता दें कि जी-20 संगठन में 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल है।