फंक्शनल डिसऑर्डर के मरीजों के इलाज में डॉक्टर कोई हड़बड़ी न दिखाते हुए पहले पूरी जांच कराने की सलाह दे रहे हैं। जैसे अगर मरीज सिरदर्द होने या लकवा जैसी स्थिति यानी हाथ पैर सुन्न होने की शिकायत कर रहा है तो सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जा रही है। सीने में दर्द की शिकायत पर ईसीजी, मिर्गी का झटका आने पर ईईजी और पैर नहीं उठ रहा है तो एनसीवी आदि जांच कराने के बाद ही इलाज आगे बढ़ाया जा रहा है।
एक्सपर्ट कमेंट
फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर बीमारी पूरी दुनिया में होती है। अमेरिका में इसके मरीज भारी तादाद में हैं। जब किसी के मन में किसी तरह का लाभ पाने की इच्छा दबी हो, मगर उसके सामने किसी तरह की मजबूरी हो, ऐसे हालात में यह बीमारी प्रभावी हो सकती है।
इस स्थिति में वह शख्स पूरी तरह बीमार नहीं होता, लेकिन बीमार होने जैसी एक्टिंग करने लगता है। ड्यूटी या किसी अन्य तरह की समस्या का संभावित भय उसके ऊपर हावी हो जाता है। इस बीमारी का इलाज मेडिकल साइंस में मौजूद है। - प्रो. वीएन मिश्र, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी, बीएचयू
फंक्शनल डिसऑर्डर का रहस्यमयी प्रतिरूप मास हिस्टीरिया
चिकित्सा के जानकार बताते हैं कि फंक्शनल डिसऑर्डर के रहस्यमयी प्रतिरूप वाली बीमारी को मेडिकल साइंस की भाषा में मास हिस्टीरिया कहा जाता है। इसके पीछे भी कुछ लाभ हासिल करने का मकसद रहता है। जैसे दूध खपाने की चाहत हो तो अचानक पत्थर की कोई प्रतिमा दूध पीने लगती है और उसके पीछे भारी भीड़ उतावली दिखती है। या फिर खास तरह की दवाओं की बिक्री बढ़ानी हो तो प्लेग के नाम पर रहस्यमयी बीमारी का प्रचार कर दिया जाता है। इस स्थिति को मास हिस्टीरिया कहा जाता है।