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शहर के सेप्टी टैंक के सीवेज का निदान करेगा एफएसटीपी

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बनारस ने स्वच्छता में एक कदम और आगे बढ़ाया है। सेप्टी टैंक के सीवेज की समस्या का निदान एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिये होगा। बिना सीवेज वाले इलाकों में यह ट्रीटमेंट प्लांट लोगों को गंदगी से निजात दिलाएगा। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए बनारस का पहला अपशिष्ट शोधन संयंत्र का निर्माण जल्द ही पूर्ण हो जाएगा। रमना में बनने वाले इस एफएसटीपी का काम चल रहा और इसके बनने के बाद बहुत बड़ी आबादी को मलजल की समस्या से निजात मिलेगी, वहीं पर्यावरण प्रदूषण से भी राहत होगी।
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रमना में बनने वाला एफएसटीपी की क्षमता 50 केएलडी (किलोलीटर प्रतिदिन) है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने कार्यदायी संस्था के साथ इस संयंत्र के लिए सात साल का अनुबंध किया है। एफएसटीपी के निर्माण में एक करोड़ 60 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके निर्माण के बाद बिना सीवेज सिस्टम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गंदगी से निजात मिल जाएगी। रोजाना 50 केएलडी मलजल एकत्र किया जाएगा और उसका शोधन करने के बाद इस्तेमाल होगा। छह माह के अंदर इसका संचालन शुरू हो जाएगा।
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक एसके रंजन ने बताया कि जिन क्षेत्रों में सीवेज सिस्टम नहीं है और वहां सेप्टी टैंक का इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर यह भरने के बाद ओवरफ्लो कर जाता है, इससे गंदगी और प्रदूषण फैलता है। इस समस्या के समाधान के लिए एफएसटीपी का विकल्प बेहतर है। जब तक सीवेज सिस्टम नहीं बन जाता है इससे काम लिया जा सकता है। रमना में इसके निर्माण का मुख्य उद्देश्य वहां पहले से संचालित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का इंटरेसेप्शन एंड डायवर्जन सिस्टम है। एफएसटीपी संचालित होने पर विभाग की ओर से एक नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर सेप्टी टैंक से कंपोनेंट एकत्र करने के लिए लोग सूचना दे सकेंगे। उनकी सूचना पर तत्काल गाड़ी पहुंचेगी।
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वाहनों से एकत्र करेंगे कंपोनेंट, होगा शोधन
बिना सीवेज वाले क्षेत्रों में लोग सेप्टी टैंक से काम चलाते हैं। एफएसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद इन्हीं घरों के सेप्टी टैंक से कम्पोनेंट एकत्र किया जाएगा। घरों तक पहुंच के मुताबिक छोटी-बड़ी गाड़ियों द्वारा सेप्टी टैंक से कम्पोनेंट कलेक्ट (सक) करने के बाद इसे एफएसटीपी लाया जाएगा जहां इससे सॉलिड और लिक्विड कंपोनेंट को अलग किया जाएगा। सॉलिड कम्पोनेंट से जहां जैविक खाद बनेगी, वहीं लिक्विड को एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) में डायवर्ट करते हुए इसे इस्तेमाल योग्य बनाया जाएगा।
पीडीडीयू नगर में बनेगा 32 केएलडी का एफएसटीपी
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीडीयू) नगर में भी एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) स्वीकृत हो चुका है। इसके निर्माण के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जमीन की तलाश है। पूरी परियोजना चार करोड़ 19 लाख की है। बीते वर्ष ही इसका टेंडर होकर बांड भी बन चुका है। प्रत्येक दिन एक हजार घरों का मलजल टैंकर गाड़ियों से खींचकर इस 32 केएलडी क्षमता वाले एफएसटीपी में लाया जाएगा जहां लिक्विड कंपोनेंट को शोधित करने के बाद इस पानी को नहरों के जरिये सिंचाई के इस्तेमाल में लाया जाएगा।
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