अब वक्त-ए-जुदाई है मुझे अलविदा कह दो, अब जाने का वक्त है मुझे अलविदा कह दो...। कुछ इन्हीं अल्फाजों और नम आंखों से लोग अब मुकद्दस रमजान को अलविदा कहने को हैं। शुक्रवार को अलविदा की नमाज के दौरान जहां लोगाें के चेहरे पर अलविदा जुमे की चमक थी वहीं दिल उदास था। अलविदा जुमा रमजान की रुखसती का पैगाम जो लेकर आया था। फिलहाल इस पर अलविदा का नूर भारी था। शहर की तमाम मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज पढ़ने को लोगों को हुजूम उमड़ पड़ा।
अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ इतनी जुटी कि मस्जिदों के दलान, सीढ़ियां, छत सब भर गईं। आलम तो ये रहा कि कई जगहों पर लबे सड़क धूप में नमाज अदा की गई। फिर चाहे वो जामा मस्जिद नदेसर रहा हो या फिर लंगड़ा हाफिज मस्जिद और उसकी तंग गलियां। ज्ञानवापी मस्जिद में भी बाहर तक नमाजियों का हुजूम उमड़ा।
ऐसे ही गंगा किनारे मस्जिद धरहरा में भी सैकड़ों लोगों ने एक साथ नमाज अदा कर मुल्क की तरक्की और अमन चैन के लिए दुआएं कीं। ऐसे ही रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, शिवाला, गौरीगंज का भी नजारा बेहद जुदा था। उधर, पुराना पुल मस्जिद के अलावा सरैया, बड़ी बाजार आदि इलाकों की मस्जिदों में भी नमाजियों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी।
ईद, जकात, सदका-ए-फित्र के मद्देनजर तकरीर हुई। तकरीर सुनने के लिए लोगों ने वक्त से पहले ही मस्जिदों का रुख कर लिया था। नमाज पढ़कर जब लोगों ने मस्जिदों से रुखसती ली तो तकरीर के नूरानी मोती उनके जहन में थे जिस पर अमल करने का उन्होंने पक्का इरादा भी कर लिया था।