राजातालाब। राजातालाब क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सीताराम शास्त्री का कहना है कि जिस भारत को राष्ट्र प्रेमी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और गांव-गांव के युवा रणबांकुरों ने आंदोलन चलाकर अंग्रेजों की चंगुल से मुक्त कराया था। अब उस भारत को सशक्त होते देखकर काफी प्रसन्नता होती है। सीताराम शास्त्री की उम्र अब सौ बरस की हो चुकी है। जुलाई महीने में ही उन्होंने अपना 100वां जन्मदिन मनाया था। उनकी इच्छा है कि अगला जीवन जब भी दोबारा मिले तो हिंदुस्तान की जमीं पर ही मिले, ताकि भारत माता के उपकार और ऋण उतार सकूं।
स्वतंत्रता काल के ऐतिहासिक महत्व के दिन को याद करते हुए बताते हैं कि 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो एक महामंत्र साबित हुआ था। उस मंत्र को लेकर ही लोग स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। गांधी जी के इस महामंत्र का यह असर पड़ा था कि गांव नगर देहात सब जगह लोग आजादी पाने को मचल उठे थे। इसी नारे को अपने जीवन का मकसद बनाते हुए किशोर और नौजवान भी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे थे। तब स्वतंत्रता प्राप्ति एक ख्वाब था, जो 1947 में हकीकत में बदला। 9 अगस्त 1942 को याद करते हुए कहा कि तब अंग्रेजी हुकूमत थी। जान की परवाह किए बगैर आंदोलन चलाया गया। विदेशी आक्रांताओं को शिकस्त देने के लिए आंदोलन कहीं-कहीं हिंसक भी हो गया था। विदेशियों की चंगुल में पड़े वस्तुओं को क्षति भी पहुंचाया गया लेकिन अब अपना राष्ट्र और अपना संविधान है। आंदोलन के नाम पर सरकारी संपत्तियों का तोड़-फोड़ करना असंवैधानिक और नियम विरुद्ध है।
भारत को मिलेगी उसकी पहचान
अब भारत की बढ़ती शक्ति को देखकर मन में प्रसन्नता होती है। यह आस जगने लगी है कि विश्व गुरु के सिंहासन पर बैठने वाला और सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत फिर से एक बार अपनी पहचान वापस पाएगा। भारतीयता और भारतीय संस्कृति को सर्वोच्च और उत्कृष्ट है। राष्ट्र के युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि देश को समृद्ध और सशक्त बनाने में उनकी भूमिका अहम है। भ्रष्टाचार का खात्मा हो जाए तो भारत एक आर्थिक महाशक्ति बनकर विश्व के समक्ष उभर सकेगा। कहा कि भारत में मेधा शक्ति अपरंपार है। भारत का युवा अपने शोध और आविष्कार के बदौलत दुनिया को अपनी हैसियत बता सकता है।