कैंट रेलवे स्टेशन के वाशिंग लाइन में काम कराने वाली एक कार्यदायी संस्था पर पांच कर्मियों ने धोखे में रखकर साढ़े सात लाख रुपये ऐंठने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने कैंट जीआरपी में तहरीर देकर आरोपियों पर कार्रवाई करने और रुपये वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
मिर्जापुर के तीन, वाराणसी व भदोही के एक-एक कर्मचारियों का आरोप है कि लखनऊ की कार्यदायी संस्था ने डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लेकर संविदा की नौकरी पर रखते हुए 18000 प्रति माह देने का वादा किया था। तीन माह तक सैलरी नहीं मिलने और नार्दन रेलवे के अधिकारियों से संपर्क साधने पर कर्मचारियों को अपने ठगे जाने का एहसास हुआ। बहरहाल, कार्यदायी संस्था के ठेकेदार से जीआरपी पूछताछ कर रही है।
मिर्जापुर के थाना चिल्ह, कोल्हुआ निवासी अरूण मौर्य का आरोप है कि पड़ोस के युवक ने कैंट स्टेशन पर संविदा की नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक कार्यदायी संस्था के ठेकेदार से मुलाकात कराया। प्लेटफार्म नंबर चार पर स्थित एक ऑफिस में एक युवक ने इंटरव्यू लिया। इसके बाद आईडी जारी करते हुए 10 नवंबर 2019 को काम पर बुलाया।
स्टेशन के ही वाशिंग लाइन में ट्रेनों की साफ-सफाई कराने का जिम्मा सौंपते हुए सुपरवाइजर के पोस्ट पर नौकरी मिली। कहा गया कि संविदा की नौकरी है और 18000 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। पड़ोसी युवक के बताए हुए बैंक खाता में डेढ़ लाख रुपये भी ट्रांसफर कर दिया गया। 77 दिन तक काम करने के बाद भी वेतन नहीं दिया गया।
इसकी शिकायत जब रेल अधिकारियों से की गई तो कार्यदायी संस्था के पास ही भेजा गया। इसके बाद मालूम चला कि कार्यदायी संस्था के तीन युवकों ने मिलकर ठग लिया। कार्यदायी संस्था ने संविदा पर नौकरी देने के नाम पर मिर्जापुर के मोहनदास, गोपाल दास, धर्मेंद्र सिंह और कुर्बान अली से बैंक खातों में डेढ़-डेढ़ लाख रुपये जमा कराया।
ऐसी शिकायत हमारे संज्ञान में नहीं है। कर्मचारियों ने यदि जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई तो जांच वहीं करेंगे। यदि हमारे पास शिकायत पहुंचती है तो अवश्य जांच की जाएगी।
रवि चतुर्वेदी, अपर मंडल रेल प्रबंधक, उत्तर रेलवे
कर्मचारी की शिकायत पर जांच पड़ताल की जा रही है। कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों से संपर्क साधा गया है।
एके दुबे, जीआरपी इंस्पेक्टर, कैंट स्टेशन