अभियोजन के मुताबिक रकम प्राप्त करने के बाद आरोपी ने न तो कोई जमीन खरीदी और न ही कारोबार शुरू किया। जब इमरान अहमद ने अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने भुगतान के लिए कुछ चेक दिए, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर सभी चेक बाउंस हो गए। खुद को ठगा महसूस करने पर पीड़ित ने सात दिसंबर 2010 को फूलपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों को परीक्षित कराया और दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को धोखाधड़ी का दोषी पाया।
न्यायालय ने सुभाष चौबे को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 91 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। साथ ही आदेश दिया कि जुर्माने के रूप में वसूल की गई पूरी धनराशि पीड़ित इमरान अहमद को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाए। अदालत के फैसले के बाद मामले का लंबा कानूनी विवाद समाप्त हो गया।