वाराणसी जिले की पुलिस ने खररिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में 2006 से नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अध्यापक पर धोखाधड़ी और कूटरचना सहित अन्य आरोपों में केस दर्ज हुआ है।
वाराणसी जिले के खररिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में 2006 से नियुक्त सहायक अध्यापक कृष्णकांत के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना सहित अन्य आरोपों में बड़ागांव थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। आरोप है कि कृष्णकांत का बीए और बीएड का शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी और कूटरचित है।
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बड़ागांव के खंड शिक्षा अधिकारी विजय प्रकाश यादव ने बताया कि जौनपुर के करौदा, सरायबीका निवासी कृष्णकांत की नियुक्ति सहायक अध्यापक के पद पर 31 दिसंबर 2005 को हुई थी। मिर्जापुर जिले की लालगंज तहसील के लालचंद ने शिकायत की थी कृष्णकांत के शैक्षणिक अंकपत्र फर्जी और कूटरचित हैं। एसटीएफ के एसएसपी ने कृष्णकांत के बीए के अंकपत्र की जांच कराई।
अंकपत्र के अनुसार, उन्होंने कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज, प्रयागराज से बीए उत्तीर्ण किया था। जांच में सामने आया कि कुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज में कृषि और विज्ञान वर्ग के पाठ्यक्रम ही संचालित होते हैं। कला वर्ग का कोई भी पाठ्यक्रम नहीं चलता है। इसी तरह से कृष्णकांत ने अपने अंकपत्र के आधार पर 1989 में छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से बीएड उत्तीर्ण होने का दावा किया था।
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जांच में बीएड का अंकपत्र भी फर्जी और कूटरचित मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर कृष्णकांत की नियुक्ति निरस्त कर उसके खिलाफ बड़ागांव थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।