शुरुआत में उनकी दुकान पर अंग्रेज अधिकारियों की वर्दियां और अंग्रेज महिलाओं के कपड़े ही सिलने और ठीक कराने के लिए आते थे। उस समय अंग्रेजों का रवैया भारतीयों के प्रति काफी भेदभावपूर्ण था। कहा जाता है कि दुकान खोलने के दौरान एक शर्त भी रखी गई थी। दुकान के बाहर इंडियन एंड डॉग्स नॉट अलाउड का बोर्ड लगवाया गया था। इसी शर्त के बाद उन्हें सिलाई का काम करने की अनुमति दी गई।
वकील और नौशाद की दुकान पर सिली वर्दी में कफ की बारीकी पसंद की जाती है। इसी कफ पर पुलिसकर्मियों की उपलब्धि के मुताबिक स्टार सजते हैं। नौशाद बताते हैं कि पुलिस अधिकारी बुलावा भेजकर नाप करवाते हैं, तो अन्य पुलिसकर्मी यहां दुकान पर आते हैं। पुलिसकर्मी, सीओ, एसएसपी से लेकर आईजी स्तर के अफसरों की वर्दी की सिलाई होती है। नौशाद बताते हैं कि कई एडीजी रैंक के अधिकारियों की वर्दी भी उन्होंने सिली है।