किआ मोटर्स की फर्जी वेबसाइट बनाकर एजेंसी दिलाने के नाम पर 72 लाख की साइबर ठगी के मामले में अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को साइबर क्राइम थाने की टीम ने पटना से गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, फर्जी बैंक खाते, डायरी, 20 डेबिट कार्ड, सिमकार्ड और 22 हजार रुपये बरामद हुए।
एडीसीपी वरुणा सरवणन टी ने बताया कि आरोपियों की पहचान बिहार के नालंदा, रघुबिगहा निवासी प्रियरंजन कुमार, सत्येंद्र सुमन उर्फ नेताजी, नालंदा के सिलाव निवासी रंजन कुमार और ईस्ट दिल्ली के मुधबिहार के भद्रावली फाजिलपुर निवासी रमेश सिंह भूटोला के रूप में हुई है। रमेश मूलरूप से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग का रहने वाला है।
गिरोह के सरगना प्रियरंजन कुमार पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि किआ मोटर्स की फर्जी वेबसाइट और ईमेल बनाकर भेलूपुर की गौरीगंज निवासी तेजस्वी शुक्ला को फंसाने के लिए फर्जी रिप्रेजेंटेटिव बनाकर उसके घर भेजा था।
एजेंसी दिलाने के लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेज भी भेजा था। फर्जी कंपनी के बैंक खाते में रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी मनी, जीएसटी फीस का हवाला देकर पैसा विभिन्न खातों में डलवाया गया। फिर फर्जी कंपनी के लेटर हेड पर फर्जी इन वायस भेज कर पीड़िता को जाल में फंसाया गया।
फर्जी सिम और बैंक खाते का करते थे इस्तेमाल
पुलिस ने पूछताछ में बताया कि वह वेबसाइट, ई-मेल से लीड प्राप्त करने, पीड़ितों को कॉल, फर्जी सिम व बैंक खातों का प्रबंध, इंटरनेट बैंकिंग से पैसे ट्रांसफर, एटीएम से निकासी करते हैं। फिर पैसों को आपस में शेयर करते थे। पुलिस से बचने के लिए फर्जी सिम कार्ड व बैंक खातों का प्रयोग करते थे। आरोपियों को गिरफ्तार टीम में साइबर क्राइम थाने के प्रभारी विजय नारायण मिश्र, निरीक्षक राजकिशोर पांडेय, निरीक्षक अनीता सिंह, एसआई संजीव कन्नौजिया, एसआई सतीश सिंह, नीलम सिंह, श्यामलाल गुप्ता, आलोक सिंह आदि रहे।