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जीवन से जूझते मिले नौ कुपोषित बच्चे 

Sun, 05 Jun 2016 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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जीवन से जूझते मिले नौ कुपोषित बच्चे
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 जनपद में कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। शनिवार को कुपोषण का शिकार होकर जीवन से जूझते नौ और बच्चों को पं. दीनदयाल जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। ये बच्चे लोहता, दानगंज और हरहुआ इलाके के गांवों से उपचार के लिए आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्रों पर लाए गए थे। यहां चिकित्सकों ने जांच की तो इनके कुपोषित होने की पुष्टि हुई। इसी के साथ इस केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। 
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दानगंज के लोहिया गांव नियारडीह में आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम पर शनिवार को चार कुपोषित बच्चे मिले। इन बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर अमित सिंह, डॉ. प्रदीप, प्रतिभा गुप्ता ने बच्चों का वजन कराया। बताया कि जांच में अतिकुपोषित मिलने पर नियारडीह के मतीन उल हक की चार माह की बेटी रोशनी, शमशेर हाशमी की दो साल की बेटी सीतारून और कयूम 6 माह को भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने रोशनी का तालू कटे होने से उसे गंभीर बताया। इसी गांव के राकेश के एक साल के बेटे आदित्य को जांच के बाद घर भेज दिया गया।

इसी तरह बड़ागांव के बलरामपुर में अनिल की बेटी भूमिका (2 वर्ष), हरहुआ ब्लाक के चमाव गांव के अरविंद की पुत्री संजू (1 वर्ष), अनौरा बड़ागांव के राज कुमार के पुत्र सुधांशु (1 वर्ष), सुनयना (2 माह), लोहता के टंडिया गांव निवासी शहाबुद्दीन की पुत्री शाहबानो (2 वर्ष), फूलपुर के आलम का पुत्र रिजवान (13 माह) को परिजन लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार के लिए पहुंचे थे। वहां इन बच्चों को अति कुपोषित पाए जाने पर एंबुलेंस से पोषण एवं पुनर्वास केंद्र लाया गया। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरहुआ में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत 33 बच्चों का इलाज किया गया और दवा दी गई।
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सभी बच्चों को सफाई से रखने और गर्मी से बचाने की सलाह दी गई। इनमें से तीन बच्चे संजू (पौने दो साल), सुनैना (2 माह) और सुधांशु (1 वर्ष) को अति कुपोषित पाए जाने पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। इन बच्चों का इलाज नोडल मेडिकल ऑफिसर डॉ. अब्दुल जावेद की देखरेख में चल रहा है। इस केंद्र में 11 अति कुपोषित बच्चे पहले से ही भर्ती हैं। इस तरह भर्ती बच्चों की संख्या 20 हो गई है जबकि मात्र बेड 10 हैं। इससे दिक्कतें बढ़ गई हैं। 
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