धार्मिक जिम्मेदारी का निर्वहन
चेनम्मा देवेगौड़ा के पिंडदान के लिए उनके छोटे बेटे एच. डी. रमेश गौड़ा विशेष रूप से वाराणसी पहुंचे थे। उन्होंने स्वयं गंगा घाट पर आयोजित धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया। रमेश गौड़ा ने अपनी मां के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने परिवार की स्थापित परंपराओं के अनुसार पिंडदान की पूरी प्रक्रिया संपन्न की। यह परिवार का एक महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य था।
काशी विश्वनाथ का दर्शन
गंगा घाट पर पिंडदान और अन्य धार्मिक रस्में पूरी करने के बाद एच. डी. रमेश गौड़ा काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने वहां बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। रमेश गौड़ा ने परिवार की ओर से विशेष प्रार्थनाएं कीं। इस दौरान उन्होंने दिवंगत चेनम्मा देवेगौड़ा की आत्मा की शांति की कामना की। उन्होंने पूरे परिवार के सुख और शांति के लिए भी आशीर्वाद मांगा।
चेनम्मा देवेगौड़ा का स्मरण
चेनम्मा देवेगौड़ा का निधन 18 जुलाई को बेंगलुरु में हुआ था। उनके निधन से परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों में गहरा शोक था। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पूर्व राजनीतिक सचिव एच. एन. शर्मा ने उन्हें याद किया। बलिया निवासी शर्मा ने चेनम्मा देवी को एक महान और स्नेहमयी महिला बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर भी उनके व्यक्तित्व से प्रभावित थे और अपनी डायरी में उनका उल्लेख करते थे।