सफल और असफल इंसान में सिर्फ सोच का फर्क होता है। परीक्षा में बोलते हैं कि सवाल बहुत कठिन था। लेकिन सवाल तो सवाल होता है, आपको आता नहीं था। समझ नहीं आता कि ऐसा कठिन परिश्रम करने के बावजूद परीक्षा क्यों नहीं पास कर पाए। भाई कठिन है तो पढ़ ही क्यों रहे। मूवी देखते समय कोई कठिन परिश्रम थोड़ी करता है।
कॅरिअर चुनना है तो वही चुनिए जो पसंद है। नहीं तो हमेशा कठिन ही लगेगा। बड़े लोगों को देखा होगा कि उन्हें संडे मंडे से फर्क नहीं पड़ता। काम ही उनका मनोरंजन है। क्योंकि वे मन पसंद काम कर रहे हैं। किसी और की बात सुनकर बात आगे बढ़ा दी तो आप किसी और की जिंदगी जिएंगे और उनकी कही बातों को सुनकर चले जाओगे। सफलता नहीं मिली यानी वो काम नहीं कर रहे थे जो वास्तव में करना है।
आज से 10 साल पहले सोशल मीडिया पर इंफ्लूएंशर्स को छपरी कहा गया। आज वही छपरियों का दल हर महीना 10 लाख कमाई कर रहा। अमेरिका और इंग्लैंड से पढ़ने वाले बिजनेस मैन अपने ब्रांड के प्रचार में इन छपरियों को पकड़ रहे हैं। क्योंकि उन्होंने ब्रांड को विवश कर दिया कि आओ हमें पैसे दो। पहले आप ही एक काम करो, उसी में मास्टर बना, लेकिन अब आप कई काम कर सकते हैं।
सामने वाले से ऐसे बात करो कि उसकी इगो हर्ट न हो। यूपीएससी की ट्रेनिंग में यही सिखाया जाता है कि आपका काम भी हो जाए और बुरा भी न लगे। विवेकानंद ने कहा है कि हमें 100 लीडर दे दो, हम देश की दशा और दिशा दोनों बदल कर रख देंगे। लेकिन कुछ लोग ऐसा करते हैं कि स्वामी जी ने कहा है तो चलो ये बन जाता हूं। जबकि ऐसे नहीं होगा। आपको अपने मन का काम करना होगा।