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Varanasi News: दस सालों में बढ़ जाएगी भूलने की बीमारी, सतर्कता जरूरी

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उम्र बढ़ने के साथ ही लोग अल्जाइमर ।भूलने की बीमारी। के घेरे में आ जा रहे हैं। लोगों में तनाव का मुख्य कारण अल्जाइमर है। यह तथ्य आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में हुए एक शोध में सामने आए हैं। शोध के अनुसार, पंद्रह वर्षों में अल्जाइमर महामारी का रुप ले सकती है। इस बीमारी के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
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अल्जाइमर के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजय नाथ मिश्र के निर्देशन में डॉ. विनीता ने पांच साल में शोध पूरा किया। प्रो मिश्रा ने बताया कि अल्जाइमर का इलाज समय पर जरूरी है। अन्यथा यह मरीज का साथ जीवन भर नहीं छोड़ती है। बताया गया कि माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट ।एमसीआई। की वजह से ग्रसित व्यक्ति के बोलने, समझने, व्यवहार में परिवर्तन दिखाई देता है। प्रो मिश्रा ने बताया कि ओपीडी हर महीने आने वाले पीड़ितों में औसतन 50 से 60 लोग अल्जाइर से ग्रसित पाए जाते हैं।
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गंगा के निकटवर्ती इलाकों में रहने वालों में भी खतरा

प्रो वीएन मिश्रा ने बताया कि शोध के दूसरे चरण में गंगा के 25 किलोमीटर दायरे में रहने वालों को भी शामिल किया गया। इनमें ज्यादातर लोग अज्लाइमर से पीडि़त पाए गए। इसका कारण जल प्रदूषण है। प्रो. मिश्र के अनुसार पौष्टिक आहार, ताजी सब्जी, फल, शुद्ध जल के सेवन से अल्जाइमर से बचा जा सकता है।
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दो हजार मरीजों की स्क्रीनिंग, 200 में मिले लक्षण


शोधार्थी डॉ. विनीता ने बताया कि शोध के दौरान न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में आने वाले दो हजार मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 200 लोगों में अल्जाइमर के लक्षण मिले। ज्यादातर लोगों की उम्र 45 से 65 के बीच है। 70 लोगों पर शोध किया गया। इनमें करीब 35 लोग सामान्य पाए गए। वहीं 35 लोग अल्जाइमर के घेरे में पाए गए। विनीता ने बताया कि अल्जाइमर पीड़ितों के शरीर में विटामिन की कमी पाई गई। जागरूकता ही इस बीमारी का इलाज है।

विश्व अल्जाइमर दिवस पर विशेष
दस सालों में बढ़ जाएगी भूलने की बीमारी, सतर्कता जरूरी
या
दस सालों में महामारी का रूप ले सकती है भूलने की बीमारी
-आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में शोध पर परिणाम
-पांच साल तक चला शोध, ओपीडी में हर माह आते हैं ऐसे 50 से 60 मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बढ़ती उम्र के साथ ही लोगों में भूलने की बीमारी यानी अल्जाइमर की समस्या भी बढ़ती जा रही है। जिस तरह से तनाव भरी जिंदगी लोग जी रहे हैं, यह भी अल्जाइमर होने का एक कारण है। आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में अल्जाइमर बीमारी पर हुए एक शोध में जो परिणाम आए हैं, वह बेहद चौंकाने वाले हैं। मरीजों को शामिल कर किए गए इस शोध में यह बताया गया है कि अगर लोग इसके प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाले दस-पंद्रह सालों में भूलने की बीमारी एक महामारी का रुप ले सकती है।
अल्जाइमर के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजय नाथ मिश्र के निर्देशन में डॉ. विनीता ने इस शोध को किया है। प्रो. मिश्र के अनुसार पांच साल से चल रहा शोध अब पूरा हो गया है, इसका प्रकाशन भी हो चुका है। अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसका अगर सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो संबंधित मरीज को जीवन भर इसी रोग के साथ रहना पड़ता है।शोध में यह बताया गया कि माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट यानी एमसीआई इसकी वजह से संबंधित व्यक्ति के बोलने, समझने, व्यवहार में परिवर्तन की समस्या आ जाती है। अस्पताल में चलने वाली ओपीडी में हर महीने औसतन 50 से 60 मरीज अल्जाइमर वाले पहुंच रहे हैं। मरीजों को इस बीमारी के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। इन मरीजों में वाराणसी के साथ ही आसपास के जिलों के भी हैं।
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गंगा के निकटवर्ती इलाकों में रहने वालों में भी खतरा
प्रो. विजयनाथ मिश्र के अनुसार शोध के दूसरे भाग में गंगा के निकट के 25 किलोमीटर दायरे में रहने वालों को भी शामिल किया गया। इसमें यह देखा गया कि इस इलाके के लोगों में भी अज्लाइमर की बीमारी अधिक देखने को मिल रही है। इसकी वजह से यहां के पानी में मिलने वाले अलग-अलग धातुओं में प्रदूषण की मात्रा अधिक मिली, जिसका असर व्यक्ति के दिमाग पर पड़ रहा है। यहीं अल्जाइमर का कारण भी है। शोध में यह भी देखा गया कि पहले के समय में लोग जब कुएं का पानी पीते थे तो वह ज्यादा शुद्ध रहता था, गंगा किनारे रहने वालों को शुद्ध पानी भी नही मिल पा रहा है। प्रो. मिश्र के अनुसार अगर पौष्टिक आहार, ताजा सब्जी, फल, शुद्ध जल का सेवन किया जाए तो इस बीमारी से बहुत हद तक राहत मिल सकती है।
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दो हजार मरीजों की स्क्रीनिंग, 200 में मिले लक्षण
प्रो. विजयनाथ मिश्र के निर्देशन में शोध करने वाली डॉ. विनीता ने बताया कि शोध के दौरान न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में आने वाले दो हजार मरीजों की जानकारी जुटाई गई। इन लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 200 लोगों में भूलने की बीमारी जैसे लक्षण देखने को मिले। इनकी उम्र 45 से 65 के बीच रही। मरीजों की सहमति के आधार पर 70 लोगों को शोध में शामिल किया गया। इसमें करीब 35 मरीज जो कि सामान्य थे जबकि 35 मरीज भूलने की बीमारी वाले शामिल किए गए। इसमें सामान्य बीमारी वालों की तुलना में जिन लोगों में अल्जाइमर जैसे लक्षण थे, उनके व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिली। साथ ही शरीर में विटामिन की मात्रा भी कम होती जा रही थी। यानी कि ये लोग अल्जाइमर से ग्रसित हो चुके थे। ऐसे लोगों को आगे का इलाज करने के लिए इनको इस बीमारी से बचाव के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
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