हाथियों को खदेड़ने के लिए तीन टीमों ने संभाला मोर्चा
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सोनभद्र के बीजपुर क्षेत्र के आस-पास के ग्रामीण इलाकों में आंतक का पर्याय बने हाथियों के झुंड को वापस भेजने के लिए गठित तीन टीमे भी नियंत्रण पाने में असमर्थ नजर आ रही हैं। हाथियों के झुंड का दो हिस्सों में बंट जाना ग्रामीणों में डर पैदा करने लगा है।
वन विभाग हाथियों को वापस छत्तीसगढ़ के जंगलों में खदेडने के लिए बंगाल व छतीसगढ़ की विशेष टीम को बुलवाया था। जो हाथियों को भगाने में माहिर थे लेकिन जरहा वन रेंज पहुंची टीम भी हाथियों के झुंड को भगाने में असफल साबित हुई। बृहस्पतिवार दोपहर पहुंची टीम ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ रणनीति तैयार कर रात में हाथियों को खदेड़ कर नेमना के जंगलों के रास्ते छतीसगढ़ के जंगलों में छोड़ने की योजना बनायी थी।
बृहस्पतिवार की रात हाथियों को भगाने का आपरेशन शुरू किया गया। टीम के सदस्यों ने उल्ला जलाकर विभिन्न भाषाओं में चिल्ला कर हाथियों को भगाने का प्रयास करने लगे। इस दौरान हाथियों का झुंड भड़क उठा और सवारीढांड स्थित पहाड़ी के उपर पहुंच गये व पहाड़ी की दूसरी तरफ स्थित रिहंद जलाशय में कूद पड़े।
हाथियों का झुंड पानी मे तैर कर दूसरे किनारे की ओर जाने की कोशिश करने लगा लेकिन 6 किलोमीटर का लंबा सफर होने के कारण आधे रास्ते में स्थित कोयरानी पहाड़ी पर तीन हाथी व दो बच्चे रूक गये। बाकी हाथियों का झुंड रिहंद जलाशय पार कर म्योरपुर रेंज के खनता गांव पहुंच गया। इस दौरान किनारे पर पहुंच हाथियों के झुंड ने दहाड़ना शुरू कर दिया।
हाथियों की दहाड़ से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने हाथी आने की सूचना वन विभाग को दी मौके पर पहुंचे विभाग के कर्मियों ने दस हाथी पहुंचने की सूचना जरहा वन रेंज के कर्मियों को दी। हाथियों के पहुंचने की खबर से वन महकमा में हड़कं प मच गया जबकि बिछड़े तीन हाथियों की तलाश शुरू कर दी गई। जंगल, पहाड़ी, घाटियों में खोजने के बाद दो बच्चो सहित तीन हाथी रिहंद जलाशय के बीच मे कोयरानी पहाड़ी पर मिले तब जाकर वन विभाग कर्मियों ने राहत की सांस ली।