बनारस में खूब बिका जलेबा।
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जलेबी तो साल भर मिलती है, जलेबा तो बस एक दिन
ग्रामीण इलाकों में सिंधौरा क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक कजरी गाई और जलेबा का आनंद लिया। बाजार में जलेबा की दुकानों पर खूब भीड़ रही। क्षेत्र के मिठाई कारोबारी नागेंद्र जायसवाल ने बताया कि बनारस जायकों का शहर है और जलेबी तो सालभर मिलती और बनती है, मगर जलेबा तो बस रतजगा के दिन ही काशी में मिलता है। भरतपुर, झंझोर, उदार, बरवा सहित कई गांवों में जलेबा की दुकानों पर शाम होते ही भीड़ लग गई।
ग्रामीण संजय कुमार ने बताया कि आज के समय में रतजगा का पर्व धीरे-धीरे केवल जलेबा खाने-खिलाने की परंपरा तक सीमित हो गया है। पंडित रोशन दुबे ने कहा कि रतजगा का पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह ग्रामीण जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। इस दिन का महत्व केवल जलेबा खाने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह एक सामाजिक मिलन का भी प्रतीक है। महिलाएं एकत्र होकर कजरी गाती हैं, जो इस पर्व की विशेषता है। जबकि समय के साथ इस परंपरा में बदलाव आ रहा है।
मनाया गया कजरी तीज महोत्सव
निवेदिता शिक्षा सदन में कजरी तीज महोत्सव का आयोजन सोमवार को किया गया। मुख्य अतिथि माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. विनोद कुमार राय और अध्यक्षता डॉ. हरेंद्र कुमार राय ने की। कार्यक्रम में पूर्वांचल की महत्वपूर्ण विधा कजरी गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां विद्यालय की छात्राओं और अध्यापिकाओं ने दी। निर्देशन डॉ. पूनम शर्मा और विभा पांडेय ( गायन),सिद्धी भट्ट नृत्य और राकेश रोशन वाद्य यंत्र ने किया। संचालन मीनू यादव ने किया।
भारत विकास परिषद ने मनाया कजरी महोत्सव
भारत विकास परिषद की नीलकंठ शाखा ने रतजगा का आयोजन किया। मां भारती एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरूआत हुई। नंदिनी सिंह व राजेश सिंह के आवास कृष्ण देव नगर में कजरी महोत्सव को धूमधाम से मनाया। प्रियंका मिश्रा ने एक से बढ़कर एक कजरी गीतों की प्रस्तुतियां दी। इस दौरान राकेश मौर्य, कमल कुमार सिंह, राजीव गुप्ता, उमा शंकर जायसवाल, ममता उपाध्याय, डॉ. आहुति सिंह मौजूद रहीं। कार्यक्रम संयोजिका गीता सिंह ने महिलाओं का स्वागत किया।