विदेशियों को बीएचयू में विज्ञान, कृषि और बाजार की पढ़ाई भा रही है। वहीं आयुर्वेद, मैनेजमेंट, म्यूजिक, कानूनी शिक्षा से दूरी बना रहे हैं। 928 विदेशी विद्यार्थियों में सबसे ज्यादा 220 विज्ञान के अभ्यर्थी हैं।
विदेशी छात्रों को बीएचयू में विज्ञान, राजनीति, दर्शन, बाजार, कृषि और सामाजिक मुद्दों की पढ़ाई भा रही है। दूसरी ओर धर्म, आयुर्वेद, मैनेजमेंट, म्यूजिक, कानून और पर्यावरण शिक्षा में रुझान बेहद कम या न के बराबर है। बीएचयू में 928 विदेशी विद्यार्थियों में से सबसे ज्यादा 220 विज्ञान के विद्यार्थियों ने 10 से अधिक विषयों में पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया है।
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विदेशी छात्रों को बीएचयू में नई शिक्षा नीति के तहत यूजी के सात और पीजी के नौ कोर्स की पढ़ाई करनी होगी। जबकि सामान्य तौर पर यूजी के 43 और पीजी के 230 कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। पीएचडी के लिए 183 विषयों का विकल्प और डिप्लोमा-सर्टिफिकेट के 29 कोर्स दिए गए हैं।
928 विदेशी छात्रों में कला संकाय के 22 विषयों में 170, कृषि और कॉमर्स में 150-150 दाखिले हुए हैं। सोशल साइंस में 130, विजुअल आर्ट्स में 50, विधि और संगीत में 40 से कम, मैनेजमेंट में 20 और संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में 10 से कम विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। वहीं, पर्यावरण संस्थान, आयुर्वेद संकाय और शिक्षा संकाय में इक्का-दुक्का ही विदेशी दाखिले हुए हैं।
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बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के छात्रों को सबसे ज्यादा भाता है बीएचयू
बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के छात्रों को बीएचयू सबसे ज्यादा भाता है। सबसे ज्यादा 369 छात्र बांग्लादेश, 344 नेपाल और 41 विद्यार्थी श्रीलंका से आए हैं। इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी एशिया से 91, ऑस्ट्रेलिया से तीन, अमेरिका और सिंगापुर से छह-छह विद्यार्थी आए हैं। इराक, तिब्बत, ईरान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, सोमालिया, अरब, इजराइल आदि देशों के छात्र और छात्राएं भी यहां पढ़ाई करने आते हैं। इन विद्यार्थियों को भी नई शिक्षा नीति के तहत प्रवेश दिया जाएगा।
ओपन एयर जिम की भी सुविधा
बीएचयू में कुल चार अंतरराष्ट्रीय छात्रावासों के 506 कमरों में 973 विदेशी छात्रों को ठहराया जा सकता है। कुल फीस 27,500 रुपये प्रति सेमेस्टर है। इनके लिए ओपन एयर जिम, साइबर लाइब्रेरी, आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर और गेस्ट हाउस कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था की गई है।
पीएचडी करने के लिए लेना होगा एस-5 वीजा
बीएचयू में रिसर्च करने के लिए पीएचडी छात्रों के पास एस-5 वीजा होना जरूरी है। तिब्बत के छात्रों की डेवलपमेंट फीस माफ रहेगी। वहीं, ईरानी छात्रों को अपने दूतावास से नो ऑब्जेक्शन लेटर लेकर जमा करना होता है। कोई भी अंतरराष्ट्रीय छात्र रेजिडेंशियल परमिट के बिना विदेश या भारत के अंदर यात्रा नहीं कर सकता। यात्रा के दौरान जाने या आने पर रेजिडेंशियल परमिट दिखानी होगी। कोर्स पूरा होने पर आखिरी बार जाते समय विद्यार्थियों को संबंधित एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी को रेजिडेंशियल परमिट जमा करना होगा।