सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध काशी के प्रति विदेशी पयर्टकों का आकर्षण भले ही अधिक हो लेकिन यहां चलने वाले विदेशी भाषा की पढ़ाई का बुरा हाल है। प्राचीनतम शिक्षण केंद्र संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कहने को तो विदेशी भाषा की पढ़ाई होती है लेकिन वह भी दम तोड़ रही है।
इसके पीछे व्यवस्थागत कमियां मुख्य वजह है। हालत यह है कि पांच साल पहले जहां जापानी-चीनी भाषा की पढ़ाई बंद हो गई वहीं इस समय बची पांच में से फ्रेंच को छोड़ बाकी की स्थिति ठीक नहीं है।
विश्वविद्यालय में आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के तहत करीब बीस साल पहले जापानी, चीनी, फ्रेंच, जर्मन, रूसी, तिब्बती, अग्रेंजी और नेपाली भाषा की पढ़ाई शुरू हुई थी। इसमें दो साल का स्नातक और एक साल का एडवांस डिप्लोमा कोर्स है।
फ्रेंच के अलावा किसी भी भाषा में नियमित शिक्षक नहीं हैं। जैसे-तैसे संविदा शिक्षकों को रखकर पढ़ाई करवाई जा रही है लेकिन नियमित भुगतान न होने से वह भी यहां आने में कतराते हैं। इसके लिए एक अलग विभाग भी बनाया गया है।
क्लास चलने की बात करें तो लंबे समय से मुख्य भवन में क्लास चलती थी लेकिन भवन की मरम्मत चलने से फिलहाल क्लास चलाने में भी दिक्कत हो रही है। पहले विभाग में नियमित शिक्षक भी थे लेकिन करीब दस साल से अधिक समय से नियमित शिक्षकों के रिटायर होने के बाद उनकी जगह किसी की नियमित नियुक्ति नहीं हुई।